Sunday, July 12, 2020

जरा सुनो
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इंसान बेईमानी से अमीर बनना चाहता है किंतु अमीर बनने के लिए ईमानदारी जरूरी है। वरना कमाया पैसा स्वत: नष्ट हो जाएगा।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


सखा
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1.
सखा उन्हें ही मानते, बुरे वक्त दे काम।
कृष्ण सुदामा के बने, दोस्त जगत में नाम।।
2.
साथी बनकर जो करे, दुश्मन सा व्यवहार।
नागिन समान छोड़ दो, नही, मौत तैयार।।
3.
संगी, साथी जग सभी, मतलब से है प्यार।
चाल समझ लो वक्त की,वरना होगी हार।।
4
बेटा जब होता बड़ा, करो मित्र व्यवहार।
रोब अगर तुम झाड़ते, मिले कष्ट तैयार।।
5.
सहचर जानो संगिनी, रखो सदा सद्भाव।
जग को सागर मान लो, दो जन की है नाव।।
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*होशियार सिंह यादव



शब्द-वेतन
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भला किया दिनरात जब, बहुत बनी पहचान।
लोग दुआएं दे रहे, वेतन उसको मान।।
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जग में अमन चैन रहे, प्रभु से मांगी मन्नत है।
सुन ली उस भोलेनाथ ने, सारी धरा जन्नत है।।
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कुदाल
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कुदाल लेकर चल पड़ा, करे मजदूर काम।
परिश्रम के बल देश का, होता जग में नाम।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा






                   जामुन
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सदाबहार होता यह पौधा,कई देशों में पाया जाए,
इसकी गहरी छाया देखो, जीवों को पास बुलाए,
बारिश मौसम में पक जाता, इसको जरूर खाये,
रोग दोष दूर कर देता, जन जन को खूब हंसाये।

ग्लूकोज और फ्रक्टोज भरा है, लोह स्रोत में नाम,
मधुमेह के उपचार में, पेट समस्या आये यह काम,
खुून कमी अगर हो, रोज खाओ इसे शुबह शाम,
मसूड़ों में फायदेमंद,मसूड़े खून को कर देता जाम।

लीवर, पथरी और गठिया में, खाओ इसे धाप धाप
त्वचा की रंगत बढ़ा दे, आवाज को कर देता साफ,
बच्चों के लिए फायदेमंद है, खिलाओ रोज जामन,
कितने काम का पेड़ है, लगाओ ला अपने आंगन।

जामुनी रंग है प्रसिद्ध जग में, खूब मन को लुभाता,
कैंसर जैसे रोगों को भी यह, होने से ये दूर भगाता
रोगी अगर खाएगा तो, एक दिन वह हंसगो जरूर,
खाओ लाकर जामुन जमकर, करना ना कोई गरूर।।
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-कविता
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कभी प्रकृति रोती है,कभी करे शृंगार,
कभी दर्द दे जाती है, कभी करे प्यार,
फूल बुलाते हवा में, कली लगी हजार,
भंवरे उन पर मंडराते, मांगे मधु उधार।

फूल कली से कह रही, बुरा है संसार,
स्वार्थ से भरा हुआ नहीं किसी से प्यार,
हमें तोड़ कर गूंध ले, माला का उपहार,
हमको पल में बेच दे, मांगे रुपये हजार।

पति प्रेम में लिप्त हो, युवती करे शृंगार,
अपने अपनी बात से, माने नहीं वो हार,
प्रेम पास में फंसे हुए, जीव जगत संसार,
परहित बिना फीका रहे,जीवन है बेकार।

शब्द एक शृंगार है, रूप मिले कई हजार,
कामवासन को समझते, यौवन का शृंगार,
शत फीसदी सच है, प्रकृति करती शृंगार,
जगत जीव, जन को, बस शृंगार से प्यार।।
वरना मिट जायेगी, इस माटी में तेरी जान।।
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दोहागजल ***************

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महादेव मैं आ गया,याचक बनके आज।
दूर करो चिंता सभी, जग में तेरा राज।।
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ज्ञान, ध्यान, से दूर हूँ,देे दो मुझको ज्ञान,
धर्म कर्म पर चल सकूँ,नहीं चाहिये ताज।
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पाप-पुण्य में भेद कर,रखना मेरा ध्यान,
तेरी छाया में रहूँ, करूँ तुम्हीं पर नाज।
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दुखिया मैं संसार में,सुनो अर्ज तत्काल,
सुन लो हे दातार तुम,मेरी भी आवाज।
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शरण मुझे भी लीजिए, मेरे भोलेनाथ,
दे दो ये आशीष अब,पूरन हों सब काज।।
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