शिव स्तुति -कुंडली छंद
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शंभू शिव के धाम पर, जाता जो नर हार।
मन्नत सारी पूर्ण हो, मिलता भोले प्यार।।
मिलता भाले प्यार, भक्त जीवन हर्षाता।
माने कभी न हार, सदा ही बढ़ता जाता।।
लगा रहे है धोक, सजते दूर तक तंबू।
करो भक्ति स्वीकार, हे शिव बाबा शंभू।।
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*होशियार सिंह यादव
आदत
विधा-मुक्तक
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नहीं बदलती आदत, लाख लगा लो जोर।
पीने वाला न माने , लो मचा लो शोर।।
आदत के कारण, मानव हो जाता पंगु,
आदत अभी लो बदल, वरना पापी घोर।।
2
कैसा हो गया जन आज, आदत से मजबूर।
आदत मेहनत की है, कहाते हैं मजदूर।।
आदत में सुधार कर लो, होगा जन का भला,
आदत नहीं सुधरे अगर, हो जन दिल से दूर।।
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*होशियार सिंह यादव
कुंडली
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खून खराबा कर रहे, छोटी छोटी बात।
कड़वी बोली पर लगे,डंडे,चप्पल,लात।।
डंडे,चप्पल लात, बहुत ही मन इतराते।
हुये लोग बदहाल, वक्त हालात बताते।।
कभी हॅँसे दिनरात, करे वो शोर शराबा।
बदल चुका है हाल, करे वो खून खराबा।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
कुंडली
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हाथी पर मत बैठिये, बोल जगत में सीख।
अगर मूक रह जन गया,नहीं मिलेगी भीख।।
नहीं मिलेगी भीख, सफलता कभी न पाता।
करता नहीं पुकार, दर्द उसे अति सताता।।
हो जीवन का नाश, मिले ना उसको साथी।
देखे जीवन अंत, मगर मन चाहे हाथी।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना, जिला महेंद्रगढ़,हरियाणा
जरा सुनो
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लोग दर्द देते हैं किंतु खुशी नहीं। जब खुशी देने की बात मन से सोच लेंगे तो बुरे दिन स्वत: खत्म हो जायेंगे।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
धूप
लेखन-सेदोका
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खुला आसमॉँ
खिल गई है धूप
नहीं बादल
नजर कहीं भी आये
नहीं लगे वर्षा हो।
2.
बारिश होती
ढक गया सूरज
नहीं हो धूप
दूर तक फसल
लहलहाती खूब।
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*होशियार सिंह यादव
प्रदत्त पंक्ति -उसकी पायल छम छम करती है जब भी
विधा-कविता
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उसकी पायल छम छम करती है जब भी
बादल गरजे, घर आंगन बरसे पानी,
वो जब अंगड़ाई लेकर चलती है जब भी
ज्यों मोरनी सावन में चले ले जवानी।
उसकी पायल छम छम करती है जब भी
जैसे बादलों के बीच बिजली चमक,
मदमस्त जवानी लेकर चलती है जब भी
युवा दिल धड़कते हैं लपक -लपक।
उसकी पायल छम छम करती है जब भी
मच जाता है गली-गली में एक शोर,
बीन के लहरें पर नागिन जोश में जब भी
दिल काबू में न रहता, कर दे विभोर।
उसकी पायल छम छम करती है जब भी
ज्यों हिरनी जंगल में मस्त हो निहारे,
हिरोइन नृत्य करती महफिल में जब भी
प्रेम अलाप दिल बिन कहे ही पुकारे।
उसकी पायल छम छम करती है जब भी
मन अंगड़ाई लेता नहीं रहता है काबू,
वो बनेे मोरनी मेरी, मोर बनता मैं जब भी
दिल उसका पुकारे आ जाओ मेरे बाबू।




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