दोहे
************************
***************************
***************************
लिखे पढ़े तब नाम हो,
सपने हो साकार।
गले लगाके तब हॅंसे,
मिले जहॉँ का प्यार।।
सपने आते जब कभी,
मन में उठे विचार।
होते सच्चे ये नहीं,
मिलती खुशी हजार।।
नींद पूरी हो कभी,
सपने आते खूब।
रंक देख जन हॅंसे,
मिले कभी महबूब।।
***********************
*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
********************************
असली परीक्षा जिंदगी जीना है और परिणाम मृत्यु के बाद आता है। जिसमें कोई बिरला ही विशिष्टता हासिल कर पाता है।
****************************
दोहा ****************************
********************************
बहा पसीना जोर से, गला गया है सूख।
खाना पीना छोड़के, श्रमिक मिटाए भूख।।
कोयल मीठे गीत सुन, मन में उठे हिलोर।
जैसे रिमझिम देखके, प्रसन्न हुआ चकोर।।
आशा जीवन नाम है,जुड़ी विश्वास डोर।
पूरी होती आश तो, मन का नाचे मोर।।
************************
*होशियार सिंह यादव
आशा
**********************
आशा जीवन नाम है,जुड़ी विश्वास डोर।
पूरी होती आश तो, मन का नाचे मोर।।
************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
-रिश्ते
रिश्ते-कविता
**********************************
***************************
निभाए जाये दिल से, कहलाते हैं रिश्ते,
रिश्तों को निभाते हैं, वो जग में फरिश्ते,
प्राण जाये पर वचन नहीं, ऐसे थे रिश्ते,
मरते दम तक निभाये जाये, वो थे रिश्ते।
रिश्ता प्रभु राम और सीता,आता है याद,
रिश्ता शिव पार्वती का, जन्मों तक याद,
रिश्ते सच्चे कहलाते, नहीं चले फरियाद,
रिश्ते सभी में होते, आम हो या जल्लाद।
बदले हैं अब रिश्ते, रिश्तों में जन पिसते,
कोर्ट कचहरी चलते, क्या यही हो रिश्ते,
मान मर्यादा भंग हुई, नहीं रहे हैं फरिश्ते,
अब तो बस पुराने हुये, याद आते रिश्ते।
आने वाले समय होगा, रिश्तों से ही दूर,
मां बाप दिल तोड़, कर देंगे वे चकनाचूर,
रिश्ते जोड़कर आज वक्त दिखाते एहसान,
समय बदल चुका है, अब तो ले पहचान।।
***********************
*होशियार सिंह यादव
प्रेम पत्र
गीत *************************************
********************************
****************************
भेजा है तुम्हें हमने, प्रेम पत्र प्यारा,
पत्र नहीं समझो, ये दिल है बेचारा।
भटका है वर्षों, कोई मिला न हमारा,
विनती करते हम, दे दो हमें सहारा।।
भेजा है तुम्हें.............................
जग में मिला ना कोई, जिसे सुनाये हम,
जीवन छोटा सा, जिसमें है गम ही गम,
दर्द दिया दाता, वो हो नहीं सकता कम,
बचा के रखा है, वो दिल लगता प्यारा,
भेजा है तुम्हें.................................
दुख दर्द मिले इतने, ऑँखें हो गई नम,
सह नहीं सकता अब,निकल जायेगा दम,
बुला रही हो तुम, मत न बरसाना बम,
हार चुका हूं मन, अब नहीं बचा चारा,
भेजा है तुम्हें..................................
खेल जीवन का, यहां सबने खेला है,
दुख दर्द एक मेला, सबने झेला है,
अकेला जग में ही, आना व जाना है,
पत्र में प्यार भरा, बस यही सहारा है,
भेजा है तुम्हें.................................
मतलब की दुनिया में, कौन किसे चाहे,
जी करता जिसको, उसने ही पाया है,
अनमोल समझ इसको, मेरा गहना है,
तुम ना कहती हो,यह मेरा प्यारा है,
भेजा है तुम्हें...............................।
भेजा है तुम्हें हमने, प्रेम पत्र प्यारा,
पत्र नहीं समझो, ये दिल है बेचारा।
भटका है वर्षों, कोई मिला न हमारा,
विनती करते हम, दे दो हमें सहारा।।
भेजा है तुम्हें.............................।।
***********************
************************
***************************
***************************
लिखे पढ़े तब नाम हो,
सपने हो साकार।
गले लगाके तब हॅंसे,
मिले जहॉँ का प्यार।।
सपने आते जब कभी,
मन में उठे विचार।
होते सच्चे ये नहीं,
मिलती खुशी हजार।।
नींद पूरी हो कभी,
सपने आते खूब।
रंक देख जन हॅंसे,
मिले कभी महबूब।।
***********************
*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
********************************
असली परीक्षा जिंदगी जीना है और परिणाम मृत्यु के बाद आता है। जिसमें कोई बिरला ही विशिष्टता हासिल कर पाता है।
****************************
दोहा ****************************
********************************
बहा पसीना जोर से, गला गया है सूख।
खाना पीना छोड़के, श्रमिक मिटाए भूख।।
कोयल मीठे गीत सुन, मन में उठे हिलोर।
जैसे रिमझिम देखके, प्रसन्न हुआ चकोर।।
आशा जीवन नाम है,जुड़ी विश्वास डोर।
पूरी होती आश तो, मन का नाचे मोर।।
************************
*होशियार सिंह यादव
आशा
**********************
आशा जीवन नाम है,जुड़ी विश्वास डोर।
पूरी होती आश तो, मन का नाचे मोर।।
************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
-रिश्ते
रिश्ते-कविता
**********************************
***************************
निभाए जाये दिल से, कहलाते हैं रिश्ते,
रिश्तों को निभाते हैं, वो जग में फरिश्ते,
प्राण जाये पर वचन नहीं, ऐसे थे रिश्ते,
मरते दम तक निभाये जाये, वो थे रिश्ते।
रिश्ता प्रभु राम और सीता,आता है याद,
रिश्ता शिव पार्वती का, जन्मों तक याद,
रिश्ते सच्चे कहलाते, नहीं चले फरियाद,
रिश्ते सभी में होते, आम हो या जल्लाद।
बदले हैं अब रिश्ते, रिश्तों में जन पिसते,
कोर्ट कचहरी चलते, क्या यही हो रिश्ते,
मान मर्यादा भंग हुई, नहीं रहे हैं फरिश्ते,
अब तो बस पुराने हुये, याद आते रिश्ते।
आने वाले समय होगा, रिश्तों से ही दूर,
मां बाप दिल तोड़, कर देंगे वे चकनाचूर,
रिश्ते जोड़कर आज वक्त दिखाते एहसान,
समय बदल चुका है, अब तो ले पहचान।।
***********************
*होशियार सिंह यादव
प्रेम पत्र
गीत *************************************
********************************
****************************
भेजा है तुम्हें हमने, प्रेम पत्र प्यारा,
पत्र नहीं समझो, ये दिल है बेचारा।
भटका है वर्षों, कोई मिला न हमारा,
विनती करते हम, दे दो हमें सहारा।।
भेजा है तुम्हें.............................
जग में मिला ना कोई, जिसे सुनाये हम,
जीवन छोटा सा, जिसमें है गम ही गम,
दर्द दिया दाता, वो हो नहीं सकता कम,
बचा के रखा है, वो दिल लगता प्यारा,
भेजा है तुम्हें.................................
दुख दर्द मिले इतने, ऑँखें हो गई नम,
सह नहीं सकता अब,निकल जायेगा दम,
बुला रही हो तुम, मत न बरसाना बम,
हार चुका हूं मन, अब नहीं बचा चारा,
भेजा है तुम्हें..................................
खेल जीवन का, यहां सबने खेला है,
दुख दर्द एक मेला, सबने झेला है,
अकेला जग में ही, आना व जाना है,
पत्र में प्यार भरा, बस यही सहारा है,
भेजा है तुम्हें.................................
मतलब की दुनिया में, कौन किसे चाहे,
जी करता जिसको, उसने ही पाया है,
अनमोल समझ इसको, मेरा गहना है,
तुम ना कहती हो,यह मेरा प्यारा है,
भेजा है तुम्हें...............................।
भेजा है तुम्हें हमने, प्रेम पत्र प्यारा,
पत्र नहीं समझो, ये दिल है बेचारा।
भटका है वर्षों, कोई मिला न हमारा,
विनती करते हम, दे दो हमें सहारा।।
भेजा है तुम्हें.............................।।
***********************




No comments:
Post a Comment