दोहे
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1.
पैदा करके धान भी, बना नहीं धनवान।
धरती सीना चीरना, किसान की पहचान।।
2.
कृषक चला हल सोचता, अब होगी बरसात।
पहले जमीन खाद दे, कर परिश्रम दिनरात।।
3.
धरती पुकार कर रही, दे दो मुझको खाद।
बो ले अनाज आज ही, आये मेरी याद।।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
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गुरु से छोटा बनकर ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है जैसे भगवान् श्रीराम गुरु वशिष्ठ तो श्रीकृष्ण ने संदीपन ऋषि के चरणों में बैठ शिक्षा पाई थी।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
सारा जगत झूठा होता, प्रकृति की सच्ची शान।
प्रकृति सानिध्य में पढ़ो, प्रकृति का उच्च ज्ञान।
शपथ
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नहीं रहे अब देश में, रिश्वत, भोज, दहेज।
आज शपथ मन ठान लो, रखना है परहेज।।
गुरु महिमा
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नमन करूं उस गुरु को,
सिखाया जिसने बोलना,
अंगुली पकड़के घुमाया,
चलना मुझको सिखाया,
मात,पिता पहले गुरु है,
नमन करता उन्हें आज,
उनकी कृपा मुझ पर है,
पूर्ण होते हैं जगत काज,
नमन करूं उस गुरू को,
जिसने पढऩा सिखलाया,
कभी रोता स्कूल में गया,
बस गोदी ले मुझे हंसाया,
पढ़ा लिखा आगे ही बढ़ा,
नहीं देखा पीछे मुड़ आज,
ऐसे गुरु को वंदन करता हूं,
वो जगत गुरु हैं सिर ताज।
ताउम्र भुला नहीं पाऊंगा मैं,
गुरुदेव की कृपा रही महान,
गुरु के कारण आज जगत में,
बनी सुंदर छवि मेरी पहचान,
शत-शत नमन गुरुदेव तुम्हें,
मैं जीवनभर नहीं भुला पाऊं,
बस एक बार तुम दर्शन देना,
चरण माटी निज माथे लगाऊं।
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