गीत
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हे प्रभु आया, दूर से, चलके तेरे द्वार।
विनति सुन लो, तुम मेरी, करो भक्ति स्वीकार।।
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मुझे पता ना, चाहिये, क्या पूजा सामान।
लेकर आया हूं, यहॉं, फूलों का बस हार।।
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दर से जाऊॅं, जब मुझे, दोगे दर्शन आज।
एक बार कहता, छुपे, हैं दिल में भी राज।।
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प्रभु मेरे ,यह जग, कहे, तुम हो पालनहार।
तेरी महिमा है बड़ी, मुझको तुझ पे नाज।।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
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मेहनत मजदूरी और ईमानदारी से कमाकर खाते हैं उनका तन और मन पवित्र होता है।
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शिवरात्रि व्रत और तप, मन को शुद्ध कर देते हैं जिससे इंसान की प्रभु के नजदीकी बढ़ जाती है।
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--होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियारणा
खग/विहग/नभचर/पक्षी
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नील गगन में उड़ रहे, मचा रहे हैं शोर।
अपने निराले रंग सेे, पक्षी करे विभोर।।
भॉँति भॉँति के खग मिले, विभिन्न उनके नाम।
पंख, पैर को देख कर, मिलता मन आराम।।
दूर जहॉँ तक देखते, खग का है संसार।
नाना भांति नाम है, गिनती कई हजार।।
पक्षी सेवा जो करे, कहलाता है देव।
उनकी सेवा भाव से, प्रसन्न मिले त्रिदेव।।
नर सेवा से है बड़ी, सेवा नभचर काम।
मिलता जरूर फल कभी, होता जग में नाम।।
कलाकार
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मारो भाला, तीर, बम, होगी कभी न हार।
कलाकार बन प्रभु खड़े, कर दे बेड़ा पार।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
विकास
विधा-कविता
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विकास पर टिका हुआ,
गांव, राज्य, देश, संसार,
विकास नहीं कैसे जीये,
विकास जन का आधार।
विकास घर का हो जाए,
घर वही स्वर्ग बन जाता,
विकास गांव का हो यदि
राज्य में वो नाम है पाता।
विकास हो जब राज्य का,
देश में होता है ऊंचा नाम,
पूरी दुनिया ही गाये फिर,
देश बड़ाई सुंदर हो काम।
विकास नहीं अगर होगा,
वो जगह नरक के समान,
जीना जन हो जाता दूभर,
रोयेगा फिर देश, जहान।।
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