Sunday, July 26, 2020


विषय-तारीख
विधा-कविता
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हर वक्त बदलता है, तकदीर बदलती है,
देश बदलता है,  हर तस्वीर बदलती है,
समय कभी नहीं रुका, ना रोका जाएगा,
तारीख गवाही दे, हर दिन नया आएगा।

इतिहास के पन्नों पर, लिखी है दास्तान,
मूक गवाह बनकर, करती वक्त पहचान,
जो चल गये जग से, वो वक्त तारीख है
जो आयेगा जग में, उसकी फिर शान है।

जीना मरना की, एक  निश्चित तारीख है,
समय सदा चलता है,, उसकी तारीफ है,
कोर्ट कचहरी में, जब मिलती तारीख है,
आएगी एक दिन वो,  उसकी तारीफ है।

तारीख पर सारा जग, सिमट ही जाता है,
तारीख नहीं लगती तो, जन दुख पाता है,
मुकरना तारीख है,  तो मिलना बारिश है,
तारीख निशाना है, बस दिल से लगाता है।

कभी वो तारीख थी, आज यह तारीख है,
सदा चलते रहना है, वो तारीख बारिश है,
फूल, कली, खिलते, बन जाती तारीख है,
महीने में तारीख हैं,पूरी साल में बारिश है।

सदा रही है चलती, इसे चलते ही जाना है,
जो बीत गई तारीख,दिन,वापस न आला है,
जैसे जन जीवन भी,  बस आना व जाना है,
ले दौड़ वक्त के साथ, अगर ज्यादा पाना है।

समयुग,त्रेता,द्वापर गये, संधिकाल शुरुआत,
आएगा कलियुग फिर, ले तारीख एक साथ,
हाथ बंधे चले जाएगा,तारीख लिख जाता है,
तेज समय चलता,बस यह तारीख बताता है।

हर घटना टिकी की तारीख लिखी जगत में,
सोच समझ कर चल,इंसान तू कर ले काम,
समस्त ब्रह्मांड की तारीख,  यह ले पहचान,
समय के साथ ना चला, मिट्टी में मिले शान।

आओ बनाए मिलकर हम, एक आशियाना,
समय तारीख अनुसार सदा चलता ही जाए,
दौड़े समय, तारीख के संग, ,अगर मिलकर,
दर्द मिटे सभी के, हंसे हम और जग हंसाये।।
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*होशियार सिंह यादव



विषय-तारीख
विधा-कविता
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हर वक्त बदलता है, तकदीर बदलती है,
देश बदलता है,  हर तस्वीर बदलती है,
समय कभी नहीं रुका, ना रोका जाएगा,
तारीख गवाही दे, हर दिन नया आएगा।

इतिहास के पन्नों पर, लिखी है दास्तान,
मूक गवाह बनकर, करती वक्त पहचान,
जो चल गये जग से, वो वक्त तारीख है
जो आयेगा जग में, उसकी फिर शान है।

जीना मरना की, एक  निश्चित तारीख है,
समय सदा चलता है,, उसकी तारीफ है,
कोर्ट कचहरी में, जब मिलती तारीख है,
आएगी एक दिन वो,  उसकी तारीफ है।

तारीख पर सारा जग, सिमट ही जाता है,
तारीख नहीं लगती तो, जन दुख पाता है,
मुकरना तारीख है,  तो मिलना बारिश है,
तारीख निशाना है, बस दिल से लगाता है।

कभी वो तारीख थी, आज यह तारीख है,
सदा चलते रहना है, वो तारीख बारिश है,
फूल, कली, खिलते, बन जाती तारीख है,
महीने में तारीख हैं,पूरी साल में बारिश है।

सदा रही है चलती, इसे चलते ही जाना है,
जो बीत गई तारीख,दिन,वापस न आला है,
जैसे जन जीवन भी,  बस आना व जाना है,
ले दौड़ वक्त के साथ, अगर ज्यादा पाना है।

समयुग,त्रेता,द्वापर गये, संधिकाल शुरुआत,
आएगा कलियुग फिर, ले तारीख एक साथ,
हाथ बंधे चले जाएगा,तारीख लिख जाता है,
तेज समय चलता,बस यह तारीख बताता है।











जरा सुनो
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तूफान भी अगर आ जाये तो डटकर मुकाबला करना चाहिये, न जाने कौन सा उकाब जान बचा दे।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

देश  तरक्की  कर  गया , बढ़ा  ज्ञान  विज्ञान ।
कुर्बानी   देकर   मिली , आजादी   की  शान ।
आजादी  की  शान , फौज  ने  नाम  कमाया ।
देकर   अपनी   जान , देश  आजाद   कराया ।
किया कुशल व्यवहार ,मित्रता कर ली पक्की ।
है  शिक्षा  में   नाम , कर  गया  देश  तरक्की ।।

उपवन  तो  अब  घट रहे , बढ़ी आपदा आज ।
होगा  जीवन  अंत  तो ,  मिटे  धरा  का  राज ।
मिटे   धरा   का  राज ,  बढ़ेगी  आफत  भारी ।
देख   हवा  में    दोष ,  डरे   सारे   नर   नारी ।
पेड़   करें   सिंगार , बने   तब  धरती   पावन ।
हरे   भरे   ही   रहें ,धरा   के   सारे    उपवन ।।

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