Thursday, July 16, 2020


सरकारी
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 सरकारी में लिख पढ़कर, बनते जन विद्वान।
यूं सदियों से रहा है, यह भारत देश महान।।
-होशियार सिंह यादव,कनीना।

मधुुुुुुमास
विधा-दोहे
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सावन पावन जग कहे, या फिर है मधुमास।
प्रकृति खूब मन दे खुशी, दिल को आये रास।।

कहे मधुमास झूमके, ले लो अब हरियाली।
दिन सुहाने लगते सभी, रातें होती काली।।

मन को हर्षाए सदा , कहलाता मधुमास।
बारिश जमकर हो अभी, तब आयेगा रास।।
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स्वरचित नितांत मौलिक रचना
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*होशियार सिंह यादव





सादगी
विधा-मुक्तक

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जीवन जीने की कला, जिसमें मिलती है सादगी।
सोचने को मजबूर करे, कहलाती है सादगी।। जग में हुये लाखों लोग जीने की अदा जानते,
मन मंदिर में बैठ जाये, वो असली हो सादगी।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महंद्रगढ़,हरियाणा-

जरा सुनो
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जीवन का खेल और लोगों से मेल बहुत कम लोग जानते हैं और जो जानता है वह सफल इंसान है।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा

 

  बहना
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मेरी बहना, दिल का गहना,
अटूट प्यार में हमको रहना,
उठी थी डोली,बहे थे आंसू,
जुदाई का गम,पड़ता सहना।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना, जिला महेंद्रगढ़,

घड़ा   दोहे
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ठंडा रखता जल घड़ा, मिटे रोग जन दोष।
फ्रिज यही है गॉँव का, देता मन संतोष।।

माटी का ही रूप है, जन को इससे प्यार।
ठंडा रखता जल घड़ा, जन जन का उपहार।।

झूठा, पापी जन कभी, पाता कभी न प्यार।
कहे उसे जग पाप का, घड़ा भरा बेकार।।

महिमा जग में गा रहे, बनकर के कुम्हार।
घड़ा नीर से जब भरा, जन जन से हो प्यार।।
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दोहा ****************************

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सावन आया झूमके, जमकर पड़े फुहार।
सखियां झूला झूलती, आपस में है प्यार।।

भक्तों में छाई खुशी, बहे आस्था बयार।
कॉँधे कॉँवर ले रहे, भोले की सरकार।।

घर में बैठे सोचते, मिल जाये धन खास।
सारी चिंता खत्म हो, मन ना रहे उदास।।
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कुमार विश्वास
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कविता
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जहां जाए पहचान बनाए, ऐसे कवि निराले है,
वक्ता और राजनीति के, धुरंधर बड़े मतवाले है,
विश्वास कुमार शर्मा , हृदयस्पर्शी कवि कहलाते,
दिल धड़कने लग जाते,जब कभी मंच पर आते।

50 वर्षीय कुमार विश्वास,प्राध्यापक भी कहलाते
मंच और मुशायरों में तो, वो मन को बड़ा हर्षाते
हिंदी साहित्य में स्वर्णप्राप्त है शोध कार्य मेंनिपुण,
डॉक्टर नाम से विख्यात, गाती दुनियां उनकेगुण।

लाखों प्रशंसक है इनके, कविता बड़ी निराली हैं,
कहीं दिन सुहाने होते हैं,कभी रातें काली काली हैं, 
गीतकार वो कहलाते हैं,फिल्मों में भी धाक जमाई,
चाय गरम फिल्म में उनका,अभिनय दिया दिखाई।

अन्ना हजारे के आंदोलन में, सक्रिय सदस्य कहे,
अमेठी लोकसभा से लड़े, दुर्भाग्य से वे हार गये,
कुमार विश्वास कहलाते, जन की  समझते चाल,
राजनीति है 5-10 साल, कव्य चले हजारों साल।

उनकी कविता में नवरस, सदा ही भरा रहता है,
सुंदर काव्य रचा उन्होंने, कोई दीवाना कहता है,
गीतकार नीरज ने , निशा नियामक अमृत पिया,
डॉ सुरेंद्र शर्मा ने ,आईएसओ 2006 नाम दिया।

सम्मेलन-मुशायरों में ,चचॢत कवि वो कहलाते,
भारी मांग के चलते , मंचों पर बार-बार बुलाते,
मधुर मधुर मुस्कान भरी,कविता करे दिल में घात
कविता अमृतमय होती, जिनकी अनोखी हो बात।।

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