मुक्त
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करे पाप दिनरात वो, अहित बुराई लाख।
बोल अधिक वो मारते, समझे अपनी शाख।।
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*होशियार सिंह यादव
दोहराव-है यारो
तुकबंदी-आम
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बड़ा कठिन होता नभ तारे तोड़ लाने का काम है यारों,
कितने हड्डी पसली तुड़वाकर हुये जग बदनाम हैं यारो।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
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राही को ठोकर लगेंगी वहीं कांटे भी चुभेंगे किंतु मंजिल पर वही पहुंचेगा जो ठोकर एवं कांटों से नहीं घबरायेगा।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा-
दोहे
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जगत मान हो ज्ञान का, दान पुण्य का नाम।
करते रहना देश हित, कब हो जाये शाम।।
पुण्य कर्म से नेह कर, देता रह कुछ दान।
जगत मान हो ज्ञान का, बढ़े देश की शान।।
सफल काम का फल मिले, ज्ञान का बढ़े मान।
अपने कर्मों से देश में, मिले बड़ा सम्मान।।
गुरु बन शिक्षा बॉँटते, खूब मिले सम्मान।
परहित के जन काम से, ज्ञान जगत पहचान।।
ज्ञान खूब जन ले बढ़ा, पर ना सीखे दान।
वो जन जीवन है बुरा, नहीं बढ़ेगी शान।।
मुक्त
विषय-चित्र
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इन हाथों से पेड़ लगाओ, मिलता जहां का प्यार,
धरती मां स्वर्ग बन जाये, पेड़ होते जगत आधार,
जिसने धरा पर पेड़ लगाये,मिला जहां का प्यार,
वृक्षमित्र जग नाम दिया है, मिटाया वायु विकार।
सबसे बड़ी धन दौलत है, मिले फल और फूल,
खूब लगाओ पेड़ धरा पर, घर हो या हो स्कूल,
हर वर्ष एक पेड़ लगाओ, करनी है उसकी रक्षा,
जीवनदायिनी हवा देते, करते जन जीवन सुरक्षा।
सोचो जरा पेड़ न हो तो, कैसे जीवन बच पायेगा,
आक्सीजन खत्म हुई,जन मिट्टी में मिल जायेगा,
फल,फूल से धन देते, फिर क्यों इनको काट रहा,
मन से अगर सोच ले, तो भ्रम सारा मिट जायेगा।
बरगद,पीपल,नीम, गुल्लर,औषधियों के हैं भंडार,
अर्जुन,आंवला,जाटी,बबूल, भरे हुए गुण हजार,
बेलपत्र,खजूर,नारियल, इनसे कर लो तुम प्यार,
पेड़ लगा जीवन सफल, वरना हो जीवन बेकार।
गरीब जन पेड़ लगाकर, भर सकता धन से घर,
पेड़ लगाओ कैसे भी, नहीं किसी का होता डर,
हाथों की करामत देखो, धन दौलत सब हैं कर,
जिसने भी पेड़ लगाये, वो जग में हो गया अमर।
आओ आज शपथ ले,हाथ उठे पेड़ लगाने को,
पाल पोषकर बड़े करेंगे, सदा जगत हंसाने को,
एक पेड़ एक हो इंसान, देखो धरा भर जाएगी,
खुशियां ही खुशियां छायेंगी, नई सुबह आयेगी।।
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*होशियार सिंह यादव




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