दोहे
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झूठ कपट में जी रहा, नैया लगे न पार।
सच का जीवन जी अभी, मिलते यार हजार।।
झूठा, पापी जन कभी, पाता कभी न प्यार।
कहे उसे जग पाप का, घड़ा भरा बेकार।।
सदा सत्य की जीत हो, असत्य की हो हार।
सच जग में यूं फैलता, ज्यों बढ़ता व्यापार।।
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*होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
तॉंका
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1.
काम आयेगा
मानव का हुनर
कभी हंसाता
कभी गुनगुनाता
जन वक्त बिताता।
2.
कहते सभी
मानव का हुनर
मिलता कहीं?
देखे से पता चले
कमा लेते हैं नाम।
3.
हुनर देख
मानव हो प्रसन्न
खुश हो मन
मानव का हुनर
बना देता है काम।
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कविता
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खाओ पीओ मौज करो,
क्या रखा है इस तनाव,
तब मिलता तनाव कोई,
पास करो भाव की भाव,
इंसान की जिंदगी होती,
कहलाती जगत में नाव,
देख देख जलते रहते हैं,
करते हैं कुछ जन कांव।
तनाव रोगों की है जड़,
इस जड़ को उखड़ दो,
वरना जिंदगी घट जाये,
कदम कदम पर ले रो।
बेशक खाना ना मिले,
क्रोध को देना है त्याग,
क्रोध जगत में बुरा है,
कहलाता है यह आग।।
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झूठ कपट में जी रहा, नैया लगे न पार।
सच का जीवन जी अभी, मिलते यार हजार।।
झूठा, पापी जन कभी, पाता कभी न प्यार।
कहे उसे जग पाप का, घड़ा भरा बेकार।।
सदा सत्य की जीत हो, असत्य की हो हार।
सच जग में यूं फैलता, ज्यों बढ़ता व्यापार।।
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*होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
तॉंका
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1.
काम आयेगा
मानव का हुनर
कभी हंसाता
कभी गुनगुनाता
जन वक्त बिताता।
2.
कहते सभी
मानव का हुनर
मिलता कहीं?
देखे से पता चले
कमा लेते हैं नाम।
3.
हुनर देख
मानव हो प्रसन्न
खुश हो मन
मानव का हुनर
बना देता है काम।
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कविता
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खाओ पीओ मौज करो,
क्या रखा है इस तनाव,
तब मिलता तनाव कोई,
पास करो भाव की भाव,
इंसान की जिंदगी होती,
कहलाती जगत में नाव,
देख देख जलते रहते हैं,
करते हैं कुछ जन कांव।
तनाव रोगों की है जड़,
इस जड़ को उखड़ दो,
वरना जिंदगी घट जाये,
कदम कदम पर ले रो।
बेशक खाना ना मिले,
क्रोध को देना है त्याग,
क्रोध जगत में बुरा है,
कहलाता है यह आग।।



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