Wednesday, July 22, 2020

कविता
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सावन के झूले पड़े, मन में उठे हिलौर,
झूला देती सखियां, छुप हुआ चितचोर,
सावन की घटा छाई, नाचे मन का मोर,
पानी लेने चल पड़े, बिजली चमके घोर।

हरियाली तीज आई, मिले मिठाई घेवर,
आपस में बात करते, भाभी संग में देवर,
बतासों का उपहार,आय बेटी के ससुराल,
नई नवेली दुल्हन के, मन में एक सवाल।

दादुर सुर में गा रहे, टिड्डे छेड़े राग मल्हार,
साजन सजनी तरस रहे, ऑँखों में है प्यार,
एक साथ पड़ रही, नभ से बूंद कई हजार,
चकवा चकवी ताक रहे, अब करना प्यार।

विरह में डूबी हुई, एक नवेली झूला झूले,
सोच रही क्या बात हुई,साजन हमको भूले,
आये ना यह विरह की रात,करती है बेचैन,
जब विदेश से साजन आये, तब आये चैन।।
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आशाओं का नाम है जीवन
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कोई रहता पर्वतों पर, कोई रहे गुफाओं में,
कोई खुश घर पर है,कोई खुश फिजाओं में,
किसी को भोजन नहीं, कोई कर रहा बर्बाद,
कोई अपनों को भूला, कोई कर रहा है याद,
क्योंकि जगत में,आशाओं का नाम है जीवन.....

कोई दर्द में जी रहा, कोई खुश है मिले यार,
कोई धोखा दे रहा है, कोई कर रहा है प्यार,
कोई तरसे पाई पाई, कोई खर्चदे पल हजार,
कोई सर्दी में पीटता, कोई करे वसन व्यापार,
क्योंकि जगत में,आशाओं का नाम है जीवन....

धर्म कर्म सब भूल गये, पाप कर्म मन लगाय,
कोई देश का लूट रहा,  कोई मुफ्त का खाय,
कोई रो रहा बिना बात, कोई रहा जग हॅँसाय,
देख देख जगत के काम, प्रभु आओ ले बचाय,
क्योंकि जगत में,आशाओं का नाम है जीवन..। 
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  फोन 09416348400


विधा- कविता
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भाई बहन को याद करें, आ गई है तीज त्यौहार,
पूरे जग में अटूट बंधन, भाई बहन का होए प्यार,
भाई कभी हलवाई बनता, बहन करे हलवा तैयार,
पंखे की हवा में खाए मिलकर,आनंद मिले हजार।

एक समय की बात सुनाऊं,भाई गया ले त्योहारी, 
कहा लो पकवान बनाए, कर ली पल में तैयारी,
पूड़ी,कचोरी,बनाया, और बनाया टमाटर का सूप,
दोनों बैठ के खाने लगे, खाया जी भर भर के खूब।

बचा हुआ सामान रख दिया, बड़ी एक अलमारी,
कहां भाई ने खाते रहना, तुम हो मेरी बहना प्यारी
बहन भाई को देखहॅँसते,क्या-क्या की कलाकारी
एक दूजे का सहयोग करेंगे,यही है सभ्यता हमारी।
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स्वरचित नितांत मौलिक रचना
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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

नमन वर्तमान अंकुर
22 जुलाई 2020
गीत बोलेंगे प्रतियोगिता
विषय-मानवता
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दर्द हजारों मिल जाते हैं, मानवता मिलती जग कम,
देख देख जन की बेशर्मी, ऑँखें हो जाती हैं नम,
आओ मिटा दे दुख जहां के , कहती दुनिया सारी है,
शुभ कर्म कहलाता है ये, दौलत जगत की सारी है।

इक बेचारा भूखा मरता, एक बड़ा व्यापारी है,
इक कॉँटों पर सो जाता है, इक ले नींद उधारी है,
कोई सर्दी पिट रहा है, कोई बेच रहा रजाई,
कोई पानी प्यासा है, कोई दारू करे हॅँसाई।
कौन किसी को सुखी देखता किस में कितना मिले दम....।
दर्द हजारों मिल जाते हैं.....................।

बच्चा गेंद को तरस रहा, दूजा खेल रहा फुटबाल,
एक के कपड़े फटे हुये, एक बेच रहा है थान
कोई कर रहा धर्म पुण्य, एक मचाता है तूफान,
एक बड़बड़ करता, एक की हो गई है बंद जुबान,
मार रहे हैं लोगों को ही, डाल रहे हैं कितने बम,
दर्द हजारों मिल जाते हैं..........

आएगी एक भोर सुहानी, मिलकर बैठे सारे हम,
बैरभाव सब मिट जाएंगे, गरीब अमीर हो जा सम,
अपना पराया भूल जाते, जग में होता तब ही नाम,
खूब करों मेहनत जग में, मेहनत करना अपना काम,
चहुं ओर नजर उठाओ, लगते हैं जगत में हम ही हम।
दर्द हजारों मिल जाते हैं..........।।

दर्द हजारों मिल जाते हैं, मानवता मिलती जग कम,
देख देख जन की बेशर्मी, ऑँखें हो जाती हैं नम,
आओ मिटा दे दुख जहां के , कहती दुनिया सारी है,
शुभ कर्म कहलाता है ये, दौलत जगत की सारी है।

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