Friday, July 10, 2020


दोहा छंद
********************************

******************************
जीवन परहित में लगा,
बन जाता है भूप।
धर्म,कर्म की राह में,
मिलती ज्यादा धूप।।

समय सभी को लील दे,
चाहे हो महिपाल।
बुरे वक्त को सोच ले,
वरना खो दे काल।।
**********************

*होशियार सिंह यादव


विधा-काव्य
*********************************

******************************
प्रेम नहीं वो जानता, जिसके मन में काम।
मिलन दिलों का हो कभी, समझो सच्चा धाम।।

मिलन हुआ प्रभु राम से, हनुमत हुये विभोर।
फूल बरसने तब लगे, सुना धरा पर शोर।।

राम चले जब वन गमन, भाई लगा वियोग।
दानव धरती के मिटे, सुंदर था संयोग।।
***********************

*होशियार सिंह यादव


जरा सुनो
*********

छलांग लगाने से आकाश नहीं हाथ आयेगा परंतु हिम्मत और जोश हो तो आकाश झुक जाएगा।
****************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा



दस्तक
विधा-कविता

***********************
दस्तक सावन दे रहा, बरसेगा अब पानी,
पेड़ों पर तरुणाई देख, लगे खिली जवानी,
चकवा-चकवी कर रहे, आपस में मनमानी
चितचोर अगर ना मिले, वो होगी बे-मानी।

दस्तक दे रहा वक्त आज, करो शुभ काम,
परहित के काम करेगा, होगा जग में नाम,
पाप, अहित से बचना, वरना हो बदनाम,
न जाने किस मोड़ पर, होगी वो ही शाम।

दस्तक दे रहा नव काल, रोग जा रहे भाग,
वर्षा ऋतु में बीज वपन, टिड्डे मेंढक गये जाग,
शिव पूजन को जा रहे, दर्शन दे रहे काले नाग,
दूर कहीं खुशी खुशी, छेड़ रहे सुंदर एक राग।

दस्तक दे रहा शाम समय, होगी वो काली रात,
सुंदर सी एक रचना कर, सपनों से करना बात,
आयेगी वो भोर सुहानी, खुशियों की ले बारात,
जागते रहना सोना नहीं, मिलेगी सुंदर सौगात।

दस्तक दे रहा नया युग, मिलकर सभी लायेंगे,
बुरे दौर से गुजर रहे, मिलकर सभी बचाएंगे,
दर्द में डूबे कितने लोग, मिलकर उन्हें हंसायेंगे।
कर्मठ बनकर, देशहित में, नया इतिहास रचाएंगे।
***********************

काव्य
****************************






सावन के झूले पड़ गये,
झूल रही सखियां सारी,
आयेगा वो पर्व सिंधारा,
करेंगे फिर तीज तैयारी।

सावन बरसता जमकर,
बागों में लगते थे झूले,
खुशी खुशी सब जाते ,
जी करे आसमां छू ले।

नहीं बारिश नहीं झूले,
ना प्रियतमा  का प्यार,
न कोई भी याद आये,
दुख दर्द बढ़े हैं हजार,

अब नहीं लौटेगा वक्त,
बीत गई सो बात गई,
झूला बेशक झूले रही,
विरह रातें अब नहीं।।

No comments: