जरा सुनो
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इंसान का व्यवहार बारिश जैसा होना चाहिए चूंकि बारिश जब आती है तो हर जन प्रसन्न कर देती है।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा-
प्रदत्त पंक्ति-
राम मंदिर प्रतीक राष्ट्रीय स्वाभिमान का
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राम मंदिर है भारत की आन बान शान का।
राम मंदिर प्रतीक राष्ट्रीय स्वाभिमान का।।
आदर्श पुत्र राम को पूरा जगत जानता,
राम मंदिर को मानो विश्व की पहचान का।।
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*होशियार सिंह यादव
शिक्षा-
**
शिक्षा तन का फूल है, खुशबू फैले दूर।
मानव बनता देव तब, बढ़ जाता है नूर।।
अशिक्षा
लगे अशिक्षा दाग सा, बिन खुशबू का फूल।
रूप, कुरूप समान हो, नहीं अंत इस भूल।।
मंत्र
जब मंत्र तंत्र सीख लो, करो अज्ञान दूर।
उल्टे सीधे काम से, गर्व काहे हुजूर।।
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*होशियार सिंह यादव
शब्द-गणेश
*************************
पहले पूज गणेश लो, फिर देवों का ध्यान।
सच्चे मन से भक्ति कर, मिले बुद्धि वरदान।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
शब्द-गणेश
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पहले पूज गणेश लो, फिर देवों का ध्यान।
सच्चे मन से भक्ति कर, मिले बुद्धि वरदान।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
शब्द-आंदोलन
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आंदोलन बापू चला, गये अंग्रेज हार।
देशभक्ति की जीत से, महका घर संसार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
शिक्षा-
**
शिक्षा तन का फूल है, खुशबू फैले दूर।
मानव बनता देव तब, बढ़ जाता है नूर।।
अशिक्षा
लगे अशिक्षा दाग सा, बिन खुशबू का फूल।
रूप कुरूप समान हो, नहीं अंत इस भूल।।
मंत्र
जब मंत्र तंत्र सीख लो, करो अज्ञान दूर।
उल्टे सीधे काम से, गर्व काहे हुजूर।।
दोहा ****************************
चापलूस बन कर करो, हजम देश का माल।
मालिक को फिर मात दो, चलकर कोई चाल।।
हरी भरी जब हो धरा, आए सावन तीज।
झूला झूले नारियॉँ, वपन काल यह बीज।।
चापलूस बन काम ले, खा ले सारा देश।
वेश बदल कर भाग जा,लूटो ऐश विदेश।।
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नमन दोहा धुरंधर
शब्द-चापलूस
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चापलूस बन काम ले, खा ले सारा देश।
वेश बदल कर भाग जा,लूटो ऐश विदेश।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
नमन साहित्यगंगा
शब्द-तीज
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हरी भरी जब हो धरा, आए सावन तीज।
झूला झूले नारियॉँ, वपन काल यह बीज।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
टप टप रखना जन बड़े, बेशक चट कर देश,
बनो चापलूस संतरी, भाग जाओ विदेश।।
दोहा **************************
चापलूस बन कर करो, हजम देश का माल।
मालिक को फिर मात दो, चलकर कोई चाल।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
दोहा **************************
चापलूस जन नाम है, बड़े गजब के काम।
करे हजम वो माल को, मालिक हो बदनाम।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
धर्म आड़ में कर रहे, उल्टे सीधे काम।
आप मलाई चाटते, प्रभु हो बदनाम।।
देश धर्म की बात पर, होते जन नाराज।
फर्ज, कर्ज को भूलते, चाहे करना राज।।
जीवन भी संग्राम है, जीते कोई आज।
करो सत्कर्म जग सदा, सिर पर बंधे ताज।।
दोहा--
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खेलकूद कर पास कर, शिक्षा बहे बयार।
जो जन शिक्षा ले नहीं, जीना हो बेकार।।
विषय-जिम्मेदारी
विधा-कविता
जिम्मेदारी
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जिम्मेदारी जगत में, मिलती हर इंसान,
जिम्मेदारी सफल हो, बने जन पहचान,
जिम्मेदारी से दूर हटे, वो जीव बेईमान,
वक्त पर पूरे कर काम, बढ़ेगी जन शान।
साधू,संत,देव,मुनि, सभी पर जिम्मेदारी,
कुछ को बुरी लगे, कुछ को लगे प्यारी,
अगर हर जन समझ ले,निज जिम्मेदारी,
तो चर अचर जग, न बढ़ेे व्यथा हमारी।
धरती पर जन्म ले, वो जीव ही कहाए,
सभी जग में प्रभु से अपना भाग्य लाये,
जन्म समय मिलती, जिम्मेदारी सबको
पूरी कर अपनी, खुद हंसे और हंसाए।
श्रीराम प्रभु कहलाते, आये थे धरा पर,
निज जिम्मेदारी ले आए, गये पूरी कर,
बड़े बड़े देव सभी, बंधे हुये जिम्मेदारी,
हंसते हुये निभाते हैं, लगती उन्हें प्यारी।
त्रि-देवों ने संभाला, अपना अपना काज,
गरीब रो रो गये,, अमीर सिर बंधा ताज,
पर वो भी जिम्मेदारी, पूरी करते जग में,
लगा सीने से जिम्मेदारी मत होना नाराज।
सूरज,चांद,सितारे नभ, निभाते जिम्मेदारी,
यह भी प्रभु की देन, व्यवस्था जग हमारी,
आओ निभाएं जिम्मेदारी,कहता है समाज,
जिम्मेदारी का बंधा,हर सिर पर एक ताज।।
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*होशियार सिंह यादव
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इंसान का व्यवहार बारिश जैसा होना चाहिए चूंकि बारिश जब आती है तो हर जन प्रसन्न कर देती है।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा-
प्रदत्त पंक्ति-
राम मंदिर प्रतीक राष्ट्रीय स्वाभिमान का
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राम मंदिर है भारत की आन बान शान का।
राम मंदिर प्रतीक राष्ट्रीय स्वाभिमान का।।
आदर्श पुत्र राम को पूरा जगत जानता,
राम मंदिर को मानो विश्व की पहचान का।।
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*होशियार सिंह यादव
शिक्षा-
**
शिक्षा तन का फूल है, खुशबू फैले दूर।
मानव बनता देव तब, बढ़ जाता है नूर।।
अशिक्षा
लगे अशिक्षा दाग सा, बिन खुशबू का फूल।
रूप, कुरूप समान हो, नहीं अंत इस भूल।।
मंत्र
जब मंत्र तंत्र सीख लो, करो अज्ञान दूर।
उल्टे सीधे काम से, गर्व काहे हुजूर।।
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*होशियार सिंह यादव
शब्द-गणेश
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पहले पूज गणेश लो, फिर देवों का ध्यान।
सच्चे मन से भक्ति कर, मिले बुद्धि वरदान।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
शब्द-गणेश
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पहले पूज गणेश लो, फिर देवों का ध्यान।
सच्चे मन से भक्ति कर, मिले बुद्धि वरदान।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
शब्द-आंदोलन
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आंदोलन बापू चला, गये अंग्रेज हार।
देशभक्ति की जीत से, महका घर संसार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
शिक्षा-
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शिक्षा तन का फूल है, खुशबू फैले दूर।
मानव बनता देव तब, बढ़ जाता है नूर।।
अशिक्षा
लगे अशिक्षा दाग सा, बिन खुशबू का फूल।
रूप कुरूप समान हो, नहीं अंत इस भूल।।
मंत्र
जब मंत्र तंत्र सीख लो, करो अज्ञान दूर।
उल्टे सीधे काम से, गर्व काहे हुजूर।।
दोहा ****************************
चापलूस बन कर करो, हजम देश का माल।
मालिक को फिर मात दो, चलकर कोई चाल।।
हरी भरी जब हो धरा, आए सावन तीज।
झूला झूले नारियॉँ, वपन काल यह बीज।।
चापलूस बन काम ले, खा ले सारा देश।
वेश बदल कर भाग जा,लूटो ऐश विदेश।।
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नमन दोहा धुरंधर
शब्द-चापलूस
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चापलूस बन काम ले, खा ले सारा देश।
वेश बदल कर भाग जा,लूटो ऐश विदेश।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
नमन साहित्यगंगा
शब्द-तीज
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हरी भरी जब हो धरा, आए सावन तीज।
झूला झूले नारियॉँ, वपन काल यह बीज।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
टप टप रखना जन बड़े, बेशक चट कर देश,
बनो चापलूस संतरी, भाग जाओ विदेश।।
दोहा **************************
चापलूस बन कर करो, हजम देश का माल।
मालिक को फिर मात दो, चलकर कोई चाल।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
दोहा **************************
चापलूस जन नाम है, बड़े गजब के काम।
करे हजम वो माल को, मालिक हो बदनाम।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
धर्म आड़ में कर रहे, उल्टे सीधे काम।
आप मलाई चाटते, प्रभु हो बदनाम।।
देश धर्म की बात पर, होते जन नाराज।
फर्ज, कर्ज को भूलते, चाहे करना राज।।
जीवन भी संग्राम है, जीते कोई आज।
करो सत्कर्म जग सदा, सिर पर बंधे ताज।।
दोहा--
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खेलकूद कर पास कर, शिक्षा बहे बयार।
जो जन शिक्षा ले नहीं, जीना हो बेकार।।
विषय-जिम्मेदारी
विधा-कविता
जिम्मेदारी
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जिम्मेदारी जगत में, मिलती हर इंसान,
जिम्मेदारी सफल हो, बने जन पहचान,
जिम्मेदारी से दूर हटे, वो जीव बेईमान,
वक्त पर पूरे कर काम, बढ़ेगी जन शान।
साधू,संत,देव,मुनि, सभी पर जिम्मेदारी,
कुछ को बुरी लगे, कुछ को लगे प्यारी,
अगर हर जन समझ ले,निज जिम्मेदारी,
तो चर अचर जग, न बढ़ेे व्यथा हमारी।
धरती पर जन्म ले, वो जीव ही कहाए,
सभी जग में प्रभु से अपना भाग्य लाये,
जन्म समय मिलती, जिम्मेदारी सबको
पूरी कर अपनी, खुद हंसे और हंसाए।
श्रीराम प्रभु कहलाते, आये थे धरा पर,
निज जिम्मेदारी ले आए, गये पूरी कर,
बड़े बड़े देव सभी, बंधे हुये जिम्मेदारी,
हंसते हुये निभाते हैं, लगती उन्हें प्यारी।
त्रि-देवों ने संभाला, अपना अपना काज,
गरीब रो रो गये,, अमीर सिर बंधा ताज,
पर वो भी जिम्मेदारी, पूरी करते जग में,
लगा सीने से जिम्मेदारी मत होना नाराज।
सूरज,चांद,सितारे नभ, निभाते जिम्मेदारी,
यह भी प्रभु की देन, व्यवस्था जग हमारी,
आओ निभाएं जिम्मेदारी,कहता है समाज,
जिम्मेदारी का बंधा,हर सिर पर एक ताज।।
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*होशियार सिंह यादव




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