नमन
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परिचय उनका दीजिये, जग को होता नाज।
ईश्वर घट-घट में बसे, तीन लोक में राज।।
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29 जुलाई 2020
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सता नहीं मॉँ बाप को, जन्म दिया अनमोल।
खाना गर देता नहीं, वचन मधुर ले बोल।।
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28 जुलाई 2020
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मौसम को भी मात दे, बदले जब इंसान।
भेड़ रूप में भेडिय़ा, कैसे हो पहचान।।
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27 जुलाई 2020
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किसको जग में निज कहे, कौन सुने मन बात।
जालिम दुनिया कर रही, अपनों पर ही घात।।
शब्द-रिमझिम
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सावन की छाई घटा, रिमझिम पड़े फुहार।
चातक नभ को ताकता, है बूंदों से प्यार।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,जिला महेंद्रगढ़,हरियाणा
दोहे
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चंचल नारी चॉँद सी, करती रहे विभोर।
पिया मिलन की आश में, पायल करती शोर।।
गौरी चित से सोचती, धरा पर घटा प्यार।
साजन सजनी दूर हैं, सावन करे पुकार।।
पायल गौरी चांॅंद सी, चंचल चित आधार।
पिया मिलन को सोचती, रूठा जाये प्यार।।
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जरा सुनो
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दूसरों को दुख देकर कुछ इंसान सुखी रहना चाहते हैं जो उनकी बड़ी भूल है। दूसरों के खुशी से इंसान खुश रह सकता है।
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-जुलाई 2020
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हॅँसी खुशी मन में भरे, जब आते त्योहार।
भाईचारा एकता, और बढ़ेगा प्यार।।
राखी धागा मानते, अमोघ है हथियार।
झुके यमराज सामने, भाई बहना प्यार।।
परिचय उनका दीजिये, जग को होता नाज।
ईश्वर घट-घट में बसे, तीन लोक में राज।।
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त्योहार
तीज त्योहार दे रहे, खुशी का पैगाम।
हॅँसते गाते ले मना, वरना होगी शाम।।
हॅँसी खुशी मन में भरे, जब आते त्योहार।
भाईचारा एकता, और बढ़ेगा प्यार।।
राखी
बहना भाई से कहे, आया है त्योहार।
हाथ पर राखी यूं खिले, ज्यों भाई बहन प्यार।।
राखी धागा मानते, अमोघ है हथियार।
झुके यमराज सामने, भाई बहना प्यार।।
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन पर्व है, भाई बहना प्यार।
हंस ले गा ले आज तू, होगी कभी न हार।।
रक्षा बंधन पर्व है, भाई बहना प्यार।
राखी बाजू पर सजे, आशीर्वाद हजार।।
नमन दोहा संवाद
दोहा
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लोक लाज अब घट रही, बदले पल में रंग।
पाप कर्म में डूबते, जन मिलते बदरंग।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,
हरियाणा
नमन ************************
परिचय उनका दीजिये, जग को होता नाज।
ईश्वर घट-घट में बसे, तीन लोक में राज।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,
हरियाणा
शब्द-परिचय
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परिचय उनका दीजिये, जग को होता नाज।
ईश्वर घट-घट में बसे, तीन लोक में राज।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,
हरियाणा
शब्द-तुलसी
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जिस घर में तुलसी लगे, मिटे रोग संताप।
देव कोण ईशान है, करो बैठकर जाप।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,
हरियाणा
त्योहार
तीज त्योहार दे रहे, खुशी का पैगाम।
हॅँसते गाते ले मना, वरना होगी शाम।।
राखी
बहना भाई से कहे, आया है त्योहार।
हाथ पर राखी यूं खिले, ज्यों भाई बहन प्यार।।
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन पर्व है, भाई बहना प्यार।
हंस ले गा ले आज तू, होगी कभी न हार।।
मित्रता
विधा-कविता
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जग में मिलने हजारों जन,
पर कुछ में बड़ी पवित्रता,
दर्द मिटाके, सुख का दाता,
कहलाती है सच्ची मित्रता।
एक है दोस्त, दूजा दुश्मन,
दोनों में जरा करलो मंथन,
दोस्त चाहे सदा ही भला,
दुश्मन चाहे काट दूं गला।
दुश्मन के दिल में नफरत,
चाहे वो जन की हो दुर्गत,
सदा करता रहे उल्टे काम,
यूं होता है जग में बदनाम।
दोस्त के दिल में बहे बयार,
खुद दुख में देता सच्चा प्यार,
दोस्त मिल जाएं कई हजार,
सच्चे मित्र मिले बस दो चार।
मित्र वहीं है मित्रता निभाए,
दुख पहाड़ सम, वो हंॅँसाए,
सदा ही गले से वारे लगाये,
कुर्बानी दे दे, नहीं घबराये।
सच्ची मित्रता सुनने मिलती,
सुन दोस्ती कलियां खिलती,
ईश्वर भी देखे, जोड़ी ,प्यारी,
दोस्ती नहीं है कभी दोधारी।
सच्ची मित्रता कृष्ण-सुदामा,
युगों युगों तक रहेगा ये नाम,
जब -जब बात सुदामा चले,
याद आयेंगे तब-तब श्याम।
सच्ची मित्रता राधा श्याम की,
रहेगा इसका गवाह इतिहास ,
राधा,गोपियां,श्रीकृष्णजी की,
दिल में महकेगी सदा सुबास।
पोरस-सिकंदर बनी थी दोस्ती,
जगमग करेगी, हर दिल जवां,
अति कष्ट झेले कर्ण महाभारत,
फिर भी कौरव हो गये स्वाह।
चाणक्य चंद्रगुप्त की थी दोस्ती,
नंदवंश करवाया पल में साफ,
जिस दुष्ट से चाणक्य भिड़े थे,
नहीं किया उसको कभी माफ।
दोस्ती त्रिजटा और सीता की,
दोस्ती रही गांधारी कुंती की,
दोस्ती पृथ्वीरात चंद्र प्रमाण,
गौरी मारा तीर न चूका चौहान।
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