दोहा**************
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दुख के काटें पथ अड़े, चलना है दिनरात।
चले पथिक मंजिल मिले, तब बनती है बात।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
दोहा
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बड़ी बड़ी बातें करें, मिले नहीं कुछ ज्ञान।
करते ओछे काम वो, समझे अपनी शान।।
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-होशियार सिंह यादव,
जरा सुनो
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अधिक बोलने से जन की ऊर्जा तो नष्ट होती ही है वहीं बुद्धिमता कम होने का प्रतीक भी होता है। ऐसे में कम तथा उचित बोले।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
अकाल
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टिड्डी हमला हो गया, है किसान बदहाल।
फसल अगर चौपट हुई, भारी पड़े अकाल।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
ओलावृष्टि सेे तंग थे, अब टिड्डी की चाल।
फसल अगर चौपट हुई, जरूर पड़े अकाल।।
अगर प्रदूषण बढ़ गया, प्रकृति मिले बदहाल।
धरा फसल चौपट हो, बढ़ेगी भूख,अकाल।।
कीड़े, टिड्डी खा गये, किसान हैं बेहाल।
फसल नष्ट हो गई, तो पड़े फिर अकाल।।
टिड्डी हमला हो गया, है किसान बदहाल।
फसल अगर चौपट हुई, भारी पड़े अकाल।।
मां
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मां मेरी पहचान ले
अज्ञानी मैं कहलाता,
बस तेरी पूजा करता,
उम्मीद वहीं से पाता।
जब जब कलम उठे,
लिखता तेरे गुणगान,
तेरी महिमा निराली,
जग में सुंदर तेरी शान।
हाथ जोड़ विनती करूं,
देना मुझको बस शक्ति,
पूजा तेरी करता रहूं मैं,
मिले ज्ञान और भक्ति।
वर्षों से दूर रहा हूं मां,
अब ना करना मुझे दूर,
तेरे चरणों में पड़ा रहूं,
नहीं मुझे कोई गरूर।
तेरी महिमा गाता जग,
गाते रहते जग त्रिदेवा,
देवी,वीणा वादिनी तू,
सेवा तेरी देती है मेवा।
तुच्छ मुझे बस जानकर,
रख ले बस मेरा ख्याल,
ज्ञान नहीं मुझे जग का,
रोज बदलता है चाल।
मन मंदिर में बसी रहो,
चलती रहे यह कलम,
हर दिन होठों पर रहे,
भक्ति कभी न हो कम।
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*होशियार सिंह यादव
कविता
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मुश्किल से थामा है,
रखना है साथ साथ,
एक दूजे के हो गए,
सेवा करेंगे दिन-रात।
रहता है इस दिन भी,
हर जन बड़ा इंतजार,
शादी परंपरा निभाते,
तब मिलता है प्यार।
छूटे नहीं, कभी भी,
हाथों से, यह हाथ,
छूटा है, अगर कभी,
बनते, उल्टे हालात।
आते हैं खयाल भी,
तब चलती है बात,
शुभ घड़ी शुभ दिन,
तब बनते हैं हालात।
नाराज ना होना कभी,
कहते हैं दूल्हा दुल्हन,
हंसी खुशी में मिलते हैं,
दोनों के आपसी मन।।





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