त्रिपदी लेखन
शब्द-अमृत/अमिय/पीयुष
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फूल का अमृत पीने को है आतुर भंवरा।
कलियों को रिझाने को है आतुर भंवरा।
गीतों से हंसाने को है आतुर भंवरा।
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*होशियार सिंह यादव
-प्यार की पाठशाला
विधा-गद्य
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प्यार शब्द बड़ा सरल, होते रूप हजार,
दुनिया की यह दौलत,मिले नहीं उधार,
पाठशाला न प्यार की, कहते हैं सुजान,
प्यार की कीमत बड़ी, यह है जन शान।
जब से सृष्टि बनी है, तब लबों पे आया,
बड़ी अजीब चीज है,इसने खूब रुलाया,
कभी हंसाया जन को, पाया न कोई पार,
ये हैं ऐसे पल दो पल, खुशी मिले हजार।
सबसे सरल शब्द है,कहनेे में लगता डर,
लबों पर धारण कर,कितने हुये है अमर,
नहीं बनी अभी तक, प्यार की पाठशाला,
अगर यह बन जाये, जगत में हो उजाला।
हीर रांझा हुये और हुये, सोहनी महिवाल
कितने युगल जान दी, प्यार हुआ था खास,
शीरी और फरियाद हुये, और लैला मजनू,
प्यार परिभाषा सीखी, जग आया नहीं रास।
प्यार की पाठशाला बने, सीखाये नया पाठ,
खुशियों का सवेरा हो, हो जाये जन के ठाठ,
आयेगा वो दिन भी जब,पढेंग़े शिक्षा ये प्यार,
इसके बिन जीवन निरस, है जग का आधार।
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*होशियार सिंह यादव
शब्द-अमृत/अमिय/पीयुष
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फूल का अमृत पीने को है आतुर भंवरा।
कलियों को रिझाने को है आतुर भंवरा।
गीतों से हंसाने को है आतुर भंवरा।
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*होशियार सिंह यादव
-प्यार की पाठशाला
विधा-गद्य
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प्यार शब्द बड़ा सरल, होते रूप हजार,
दुनिया की यह दौलत,मिले नहीं उधार,
पाठशाला न प्यार की, कहते हैं सुजान,
प्यार की कीमत बड़ी, यह है जन शान।
जब से सृष्टि बनी है, तब लबों पे आया,
बड़ी अजीब चीज है,इसने खूब रुलाया,
कभी हंसाया जन को, पाया न कोई पार,
ये हैं ऐसे पल दो पल, खुशी मिले हजार।
सबसे सरल शब्द है,कहनेे में लगता डर,
लबों पर धारण कर,कितने हुये है अमर,
नहीं बनी अभी तक, प्यार की पाठशाला,
अगर यह बन जाये, जगत में हो उजाला।
हीर रांझा हुये और हुये, सोहनी महिवाल
कितने युगल जान दी, प्यार हुआ था खास,
शीरी और फरियाद हुये, और लैला मजनू,
प्यार परिभाषा सीखी, जग आया नहीं रास।
प्यार की पाठशाला बने, सीखाये नया पाठ,
खुशियों का सवेरा हो, हो जाये जन के ठाठ,
आयेगा वो दिन भी जब,पढेंग़े शिक्षा ये प्यार,
इसके बिन जीवन निरस, है जग का आधार।
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*होशियार सिंह यादव



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