सुनो
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दमदार इंसान ऊंचे वृक्ष की भांति आसमान छू लेता है किंतु कमजोर व्यक्ति बेल की भांति किसी सहारे से ही ऊपर चढ़ सकते हैं। सहारा छूटते ही बेल धड़ाम से गिर जाती है।
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*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
दोहा
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1.
पानी,ऑँधी रोक दे, मेड़ खेत की जान।
किसका कितना खेत है,होती है पहचान।
2.
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दया, धर्म दिल में बसे, और दान हो हाथ।
जनहित में कुछ काम कर, मिलेंगे प्रभु साथ।।
3.
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सैन्य शक्ति से देश की, दुनिया में पहचान।
जन गण मन महके जहॉँ, है भारत की शान।।
कविता
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बढ़ती जा रही अब,
देशों के बीच द्वंद्व,
करना होगा एक दिन,
जीत का उद्घोष बुलंद।
युद्ध हो या तूफान हो
हम न किसी से कम
हिम्मत के हौसले हैं
जीत ही जाएंगे हम।
आसमान पकड़ लेंगे
हवा को जकड़ लेंगे,
समुद्र को पी जाएंगे
दुश्मन न बच पाएंगे।
हमारी उड़ान ऊंची
हमारे पंख निराले हैं
काल हमारा नाम है
हम देश रखवाले हैं।
आएगा हमारे सामने
मिला देंगे मिट्टी में,
सीने पर मार कटार
लिख देंगे चिट्ठी में।
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*होशियार सिंह यादव
भ्रम
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काट रहा क्यों पेड़ों को?
तेरे ये नहीं अ'छे कर्म,
पेड़ काट जग बच जाये,
मान ले,यह तेरा है भ्रम।
बहुत हो चुका अब तो,
कर ले थोड़ी बहुत शर्म,
रोक दे अंधाधुंध कटाई,
बस थोड़ा सा बन नरम।
खूब पेड़ लगा धरा पर,
इंसान का यह है धर्म,
पर्यावरण दूषित हो रहा,
क्यों बन गया है बेशर्म।
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