Tuesday, June 02, 2020

कविता
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चहुं ओर आच्छादित पेड़
महक रहे उपवन में फूल,
कहीं झरने बहते कलकल
कांटों की चुभन लगे शूल।
नीला अंबर बरसते बादल
धरा पुकार रही बांहें फैला,
कहीं गंगा, यमुना बहती हैं
फसलों पर यौवन है खिला।
आम,नीम, सेब,अमरूद पर
कोयल,बुलबुल करे पुकार,
रंग  बरसाता  सावन आया
झूम झूमकर गाती है बहार।
कहीं पर्वत,कहीं गहरी खाई
कहीं उबड़ खाबड़ धरा हुई,
कभी सर्दी कभी गर्मी आती
कहीं धूप है, है छांव कहीं।
देखके प्रभु लीला चहुं ओर
मन करता कहीं  डालूं डेरा,
हिम आच्छादित  हिमालय
सुंदर देश बना  भारत मेरा।।

कविता

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कलम हाथ,महके सुधा, छवि पोस्ट अति प्यारी।
जमकर कविता हम रचे,  पढ़ लो अब हमारी।।


जरा सुनो 

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कुछ लोग दूसरों के गम में खुशी ढूंढते हैं जबकि कुछ लोग दूसरों दर्द मिटाकर खुशी ढूंढते हैं। जबकि खुशी एवं गम दोनों के घर दस्तक देते हैं। **  होशियार सिंह यादव

छंद  (दोहा छंद)

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शिक्षा को धन मान कर,
करो सदा अभ्यास।
जितनी शिक्षा पा सको,
बढ़ जाते हैं श्वास।।

दुख हरदम सहते रहो,
सहो दर्द अभ्यास।।
सुख मन के भूले अगर
कष्टों का हो नाश।।

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*होशियार सिंह यादव
-ऑवला
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उर रोगों में ऑवला, यह है अमृत समान।
खनिज लवण भरपूर हैं, इसको ले पहचान।।                            
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*होशियार सिंह यादव

दोहा नंबर-01
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शिक्षा का है अधिकार, पोथी ले लो हाथ।
यूं ही खोया गर समय, कोई ना दे साथ।।
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*होशियार सिंह यादव



दोहा नंबर-02
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शिक्षा मन का आइना, सदा रखो तुम ध्यान।
कूड़ा कचरा ढोइये,   बिन शिक्षा बिन ज्ञान।।

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*होशियार सिंह यादव








बीमार
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गलत समय आहार ले, हो जाये बीमार।
चटनी, रोटी, दूध से,करो सदा ही प्यार।।
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*होशियार सिंह यादव

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