Tuesday, June 09, 2020




जरा सुनो
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 इंसान ने तन में तेज लाने वाली खुराक दूध, घी, मक्खन, सुंदर वाणी को गौण बना दिया है और  तन को निस्तेज बनाने वाली चुगली, बुराई, कटाक्ष, धोखा, फरेब जैसी खुराक में बड़ा मजा आने लगा है।
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.........होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा

दोहा--
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कोरोना बदनाम है, घातक उससे लोग।
मनुज रोज ही मारता,एक दिन मारे रोग।
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शब्द-समर्पण
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दाता जन की नाव को, करे सदा ही पार। ।
शुद्ध समर्पण भाव हो, कभी नहीं हो हार।।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा


शब्द-मूल्य
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तन धन मूल्य ऑँकते, धर्म कर्म को भूल।
पाप कर्म को देख लो, चुभते हैं ज्यों शूल।।
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मुक्तक
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1.
जग में कुर्सी की माया।
वो ही धूप कहीं छाया।
कुर्सी से नेह नहीं रखे।
उसको मजा नहीं आया।

2.
नेता की हो जीत।
होती कुर्सी प्रीत।।
 कुर्सी छीन जाती।
भूला सारे गीत।
3.
कहते कुर्सी की है माया।
इसे नेता ने दिल लगाया।।
हार जाये रोता रहेगा।
मिले कुर्सी वो मुस्कुराया।
4
कुर्सी की बड़ी माया।
भेद नहीं कभी पाया।।
जिसको कुर्सी मिली हो।
नेता फिर मुस्कुराया।
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*होशियार सिंह यादव



            गीत
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दुनिया करे ना कभी प्रीत,
आओ मिलकर गाए गीत।
जो मन पर काबू पा जाये
होती है उसकी ही जीत।।

दर्द भरी दुनिया होती
दर्द में में घुट घुटके रोती,
प्रभु नाम सहारा होता
वो ही एक सच्चा मीत।
आओ मिलकर गाए गीत......

धर्म कर्म सदा ही चलता
प्यार सदा दिलों में पलता,
धोखा देना आदत बन गई
जन जन की बनी है रीत।
आओ मिलकर गाए गीत....

जाना पड़ेगा सदा अकेला
झूठा है दुनिया का मेला
जग का दुख सभी ने झेला
निभा रहे हैं जग की प्रीत
आओ मिलकर गाए गीत।

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