समर्पण
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1.
करे समर्पण देश को,करो देह बलिदान।
जीवन होगा तब सफल,बढे जगत में मान।।
2.
देश धर्म पर आ पड़े, विपत्ति बढ़े हजार।
रहो समर्पण भाव से, मिले जगत का प्यार।।
3.
सदा भले के काम कर, देश समर्पण भाव।
दान पुण्य कर ले सदा, हो भव नैया पार।।
4.
भाव समर्पण मन रहे, देश धर्म की बात।
जब कुर्बानी मांगता, भारत का दो साथ।।
5.
चिंता मन में हो कभी, चले देश की बात।
अपना जीवन त्याग कर, चल समाज के साथ।
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*होशियार सिंह यादव
द्विपदी लेखन
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1
पावस के दिन याद हैं, खेतों में हो धान।
पानी चारों ओर हो, हरित धरा पहचान।।
2
नभ पर बादल छा रहे, बादल गरजे साथ।
मोर वनों में नाचते, होती तब बरसात।।
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आंसू
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कविता
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आंसू कहते हैं,
दिल की बात,
दर्द कभी न दे,
प्रभु ना दे साथ।
गरीब के आंसू,
बन जाते आग,
नहीं बहाओ ये,
वरना लगे दाग।
आंसू की जगह,
दो कुछ मुस्कान,
खुशियां जो देता,
जग में है महान।
इंसान बन जाओ,
आंसू जरा हटाओ,
गरीब जन मिलते
दिल से लगाओ।।
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*होशियार सिंह यादव
कविता
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नफरत का बाजार
मिलता है उधार,
खरीद ले लाला,
ढूंढना फिर प्यार।
मानव मानव में,
फैलती है बुराई,
बुरा अंजाम हो,
होगी जग हंसाई।
इंसानों में रोग,
कहाये नफरत,
जग में कुछेक,
रखते हसरत।
हटाओ जन से,
फैला दे उजाला,
नफरत का जहर
क्यों मन पाला।
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