Monday, June 08, 2020


जरा सुनो
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विपत्ति आने पर इंसान हौसला खो देता है। यदि विपत्ति के समय हौसला कायम रहे तो विपत्तियां सूखे पत्ते की भांति उड़ जाती हैं।
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-----होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

दोहा--
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धर्म कर्म से नाम हो, फिर क्यों करता पाप।
गरीब जन मन को दुखा, लगे बड़ा ही श्राप।।
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दोहा किस्त नंबर -6
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1.
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गर्मी बढ़ती जा रही,    कर लो घर आराम।
चहल पहल तब ही करे, जब हो जाये शाम।।


2.
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नाम कमाते हैं सदा,    करते जो संघर्ष।
कामयाब जब हो कभी, मन में होगा हर्ष।।


3.
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तबियत मलंग के लिये, पिये टमाटर सूप।
रोग दोष सब दूर हो,  निखर उठेगा रूप।।







दोस्ती एक रिश्ता
विधा-पद्य
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दोस्ती एक रिश्ता, दोस्त फरिश्ता,
दोस्ती एक गीता, दोस्त जैसे सीता,
दोस्ती एक प्यास, दोस्त एक पानी,
दोस्ती के आगे लगे, दुनिया बेगानी।
दोस्ती एक देवता, दोस्त है याचक,
दोस्ती एक खाना, दोस्त बने पाचक,
दोस्ती एक गन्ना, दोस्त बनता चीनी,
दोस्त बिना लगे जग पानी ही पानी।
दोस्ती एक दिल, दोस्त होता है मन,
दोस्ती बने आंखें, दोस्त बनता है तन,
दोस्ती एक फूल, दोस्त बनता सुगंध,
दोस्त बिना जग में ना आवाज बुलंद।
दोस्ती एक दिन, दोस्त ज्यों है सवेरा,
दोस्ती एक शादी, दोस्त बनता सेहरा,
दोस्त एक मिलन, दोस्त होता है प्यार,
जिसका सच्चा दोस्त ना, जीवन बेकार।।
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*होशियार सिंह यादव


चित्रलेखन
विधा-गीत
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मां तू क्यों सो रही है,
भूखा खड़ा बेटा पास,
मां से बड़ा ना जग में
लेकर आया हूं आश।

जब मैं  भूखा आता हूं,
तुम भोजन मुझे कराती,
कभी गोदी कभी लोरी,
मुझको सदा हंसाती,
लौटके आया दूर से,
जगत ना आया रास,
मां तू क्यो.............।

जग में सच्ची मां होती है,
दर्द मिले जब वो रोती है,
रात रातभर नींद खोती है,
उठ खड़ी हो जल्दी,
चोट लगी लगा हल्दी,
गर्मी से न आय सांस,
मां तू क्यों................।
अपने भी धोखा जन देते,
मार पीट बाल छीन लेते,
रो रो आंसू पल पल बहते,
जल्दी से गले लगा ले,
मुझे अपने पास बिठा ले,
दर्द हो रहा गले के पास,
मां तूं क्यो...................।

और दिन जब मैं आता था,
झटसे निज पास बुलाती थी,
अपने आंचल में छुपाके मुझे,
अपना दूध पिलाती थी,
गहरी नींद क्यों आ गई,
मैं कब से खड़ा निराश,

मां तू क्यों सो रही है,
भूखा खड़ा बेटा पास,
मां से बड़ा ना जग में
लेकर आया हूं आश।
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*होशियार सिंह यादव


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