कविता
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भारत वीरों का देश, वीर बड़े महान,
वतन पर मर मिटे, यही बस पहचान,
मातृभूमि शीश झुकाते, तिरंगा है शान,
रणबांकुरे होते हैं, किसी देश की जान।
खतरों के खिलाड़ी, दिल में नहीं चाल,
जल, थल और नभ, दिखलाते कमाल,
हर कष्ट, हर दर्द में, रहते वो खुशहाल,
अपने घरों से सोते हैं, वो करे देखभाल।
घर और बच्चों से वे, रहते सदा ही दूर,
आदेशों का पालन हो, नहीं कतई गरूर,
ऐसे ही जांबाजों से, चमकता भारत नूर,
खतरों के खिलाड़ी, हटाते खतरेहुजूर।।
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*होशियार सिंह यादव
दीदार
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चार दिन की जिंदगी
उसमें भी कष्ट हजार,
मिले कभी जब प्यार
हो जाये दोस्त दीदार।
दुष्ट जन का कभी ना
चाहते हम हो दीदार,
बस यही तमन्ना रहती
दोस्त मिले कई हजार।
दर्शन हो गये हैं दुर्लभ
ऐसे हो गये अब दोस्त,
कुछ गम में डूबे हुये हैं
खाते हैं पान और पोस्त ।
आयेगा वो दिन जरूर
सभी दुख दर्द मिटेंगे ,
जहां फिजा आई हुई
वहां भी फूल खिलेंगे।
कुंडली
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आज डर रहे रोग से, ले ली कितनी जान।
वैज्ञानिक अभी दुखी, नहीं दवा पहचान।
नहीं दवा पहचान, बस अब मास्क लगाये।
पहले पहनों स्वयं, फिर सभी को पहनाये।
चले सभी नियम पर, हो जायेगा जन नाज।
कोरोना तब मिटे, न रहे जैसा दिन आज।।
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*होशियार सिंह यादव
नीति
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नीति, रीति पर ही चलो, जीवन की पहचान।
नियम तोड़ कर जो चले, घट जाये जन मान।।
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होशियार सिंह यादव,कनीना, फोन 09416348400
रसिक
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रसिक लोग जग में सदा, मिले सरल स्वभाव।
कितने ही दुख आ पड़े, वो ना खाये ताव।।
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होशियार सिंह यादव,कनीना, हरियाणा
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भारत वीरों का देश, वीर बड़े महान,
वतन पर मर मिटे, यही बस पहचान,
मातृभूमि शीश झुकाते, तिरंगा है शान,
रणबांकुरे होते हैं, किसी देश की जान।
खतरों के खिलाड़ी, दिल में नहीं चाल,
जल, थल और नभ, दिखलाते कमाल,
हर कष्ट, हर दर्द में, रहते वो खुशहाल,
अपने घरों से सोते हैं, वो करे देखभाल।
घर और बच्चों से वे, रहते सदा ही दूर,
आदेशों का पालन हो, नहीं कतई गरूर,
ऐसे ही जांबाजों से, चमकता भारत नूर,
खतरों के खिलाड़ी, हटाते खतरेहुजूर।।
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*होशियार सिंह यादव
दीदार
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चार दिन की जिंदगी
उसमें भी कष्ट हजार,
मिले कभी जब प्यार
हो जाये दोस्त दीदार।
दुष्ट जन का कभी ना
चाहते हम हो दीदार,
बस यही तमन्ना रहती
दोस्त मिले कई हजार।
दर्शन हो गये हैं दुर्लभ
ऐसे हो गये अब दोस्त,
कुछ गम में डूबे हुये हैं
खाते हैं पान और पोस्त ।
आयेगा वो दिन जरूर
सभी दुख दर्द मिटेंगे ,
जहां फिजा आई हुई
वहां भी फूल खिलेंगे।
कुंडली
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आज डर रहे रोग से, ले ली कितनी जान।
वैज्ञानिक अभी दुखी, नहीं दवा पहचान।
नहीं दवा पहचान, बस अब मास्क लगाये।
पहले पहनों स्वयं, फिर सभी को पहनाये।
चले सभी नियम पर, हो जायेगा जन नाज।
कोरोना तब मिटे, न रहे जैसा दिन आज।।
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*होशियार सिंह यादव
नीति
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नीति, रीति पर ही चलो, जीवन की पहचान।
नियम तोड़ कर जो चले, घट जाये जन मान।।
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होशियार सिंह यादव,कनीना, फोन 09416348400
रसिक
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रसिक लोग जग में सदा, मिले सरल स्वभाव।
कितने ही दुख आ पड़े, वो ना खाये ताव।।
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होशियार सिंह यादव,कनीना, हरियाणा



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