दोहा किस्त नंबर 5
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1.
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लहू रंग जो खेलते, होते जो कुर्बान।
गौरव गाथा वो लिखे, बढ़े देश की शान।।
2.
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सुख दुख दोनो ही मिले, जीवन के हैं गीत।
मन पर काबू जो करे, वो है सच्ची जीत।।
3.
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जीत कभी हो देश की, गाये मंगल गीत।
हार गया वो रोत है, जग की होती रीत।।
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दीदार/दर्शन
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मन प्रसन्न हो जाये
जब होते हैं दीदार,
प्रभु ऐसे दाता होते
जिनसे करते प्यार।
ढूंढ रहे यहां वहां
ढूंढा है कहा कहां,
बसते मन मंदिर में
मिलते जीव जहां ।
होंगे दीदार जरूर
मन में है विश्वास,
वो जग रखवाला,
हम बने हैं दास।
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*होशियार सिंह यादव
ईश्वर वंदना
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तुम हो दया निधान,
तुम पालन कर्ता हो,
तेरा नाम सुमरते है,
जग दुख हरता हो।
जिसने मेरे दाता,
तेरा नाम पुकारा है,
तेरा रूप अनोखा है,
जग उजियारा है,
तुम पिता जग के,
तुम ही माता हो.....
तुम हो दया.........।
जिसने जन्म लिया,
उसे जाना होता है,
सोच सोच जन तो,
व्यर्थ में रोता है,
तेरी शरण में हैं
तुम्हें पुकारा है..
तुम हो दया..........।
विनति करता हूं
इच्छा रखता हूं
पूरी कर देना
मन में रखता हूं,
तुम दो वरदान
यकीन हमारा है
तुम हो दया निधान,
तुम पालन कत्र्ता हो,
तेरा नाम सुमरते है,
जग दुख हरता हो।।
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