Monday, June 01, 2020


देशदूत

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विधा-कविता
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हर क्षेत्र में परचम फहराये
देश की खातिर जान गंवाये,
तिरंगा देश का झुकने ना दे
दुख झेलकर,जन को हंसाये।
सीमा पर सजग पहरा देते हैं
खेत, उद्योग में करे जो काम,
देश की आन को गिरने न दे
करते है मातृभूमि को सलाम।
अपने लहू से माटी को सिंचे
दुश्मन उनके जो  मचाते लूट,
अपने पराये  में भेद ना करते
देश के रक्षक वो होते देशदूत।
खून पसीना बहाते रहते सदा
मांगते नहीं मुंह से कोई मोल,
देशदूत कहलाते  हैं भारत के
कलम उनकी आज जय बोल।।
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*होशियार सिंह यादव




जरा सुनो
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भागीरथ, पवित्र गंगा को धरती पर लाकर हर जन को एक संदेश दे गये कि भागीरथी प्रयास से सब कुछ संभव है। सभी को यह प्रयास करना चाहिए।
----होशियार सिंह यादव, कनीना
 



जग की प्रवृत्ति है कि दूसरे पर लांछन लगाना किंतु खुद को लोग गंगा जैसा पवित्र समझते हैं।

करेला
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नीम करेला लाभ दे, कर लो रस का पान।
रोग मिटे तन मोद में,   बढ़े देह में जान।।
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*होशियार सिंह यादव



 


विजय
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काम, कोप को विजय कर, मानव बने महान।।
सही वक्त की बात कर,   बन जाता विद्वान।।
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होशियार सिंह यादव



 


निम्र दोहे पर मनन करें
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शिक्षा बिन जीवन नरक, शिक्षा हो उपहार।
सोच समझ हे कर्णधार, शिक्षा से कर प्यार।।




गोदी में बच्चे को लेकर, बच्चा हुआ विभोर।
कातिल घात लगाये है, कलियुग समय घोर।।




दोहा नंबर-01
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शिक्षा का है अधिकार, पोथी ले लो हाथ।
यूं ही खोया गर समय, कोई ना दे साथ।।
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