Thursday, June 11, 2020

दोहे
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1.
कुर्सी माया को नमन,  करवा देती काम।
छीन गई जब हाथ से, भजो बैठ कर राम।।
2.
कीमत कुर्सी देख के, बैठे उस पर लोग।
इसका चक्कर जान ले, होता कुर्सी रोग।।
3.
कुर्सी कर लो  पास में, फिर ना लगे हाथ।
अगर गई वो हाथ से, जग ना देता साथ।।
4.
रोते है वो जोर से, कुर्सी छूटे हाथ।
मुंह से वो ना बोलते, हो जा दिन में रात। ************



क्षणिका
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1.
पुराने थे जो लोग ,
आज हो गए हैं नये,
नए लोग ईद के चांद बने
न जाने कहां खो गए।
2
सब कुछ नया
हम भी नये तुम भी नये
तो पुराने कहां जाएंगे ?
पुराने तो बादलों की भांति
एक दिन डूब जाएंगे।

पहाड़ी गांव
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घनी छांव, नहीं चले नाव,
शुद्ध पवन, छोटे से भवन,
बादल आये, बरसते जाये,
थके पांव,पहाड़ी का गांव।

पवन पुरवाई, बादल शोर,
दिखे दूर दूर, मन-विभोर,
महके पत्थर, वाह जलवा,
करे विभोर, नाचे मन मोर।

पहाड़ी गांव,दूर तक छांव,
कोयल गाती, मन लुभाती,
कहीं पशु चरे,मन को हरे,
ग्रीष्म आती, बसंत सुहाती।

छोटे पौधे,  हरी हरियाली,
सर्दी आये, बर्फ जम जाये,
हर दिन लगे, बसंत बहार,
लगे यूं प्रकृति, हमें हंसाये।

विविध जीव, मन बहलाते,
स्वर्ग की वो, याद  दिलाते,
पेड़ों पर ये,पक्षी चहचहाते,
कभी नहीं वो, दिल दुखाते।
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थोड़ी सी तो राहत दे दो
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आसमान से बरसे आग,
टिड्डे भूले अपना राग,
सरीसृप बिलों में दुबके,
अब नहीं फुंकारते नाग।
पेड़ लगे ज्यों जले जले,
गर्म जल उतरे नहीं गले,
छोटे पौधे जल भुन गये,
विपत्ति तो टाली ना टले।
जोहड़ों में घट गया जल,
सूख गये जल वाले नल,
कृषक तके नभ पल पल।
हे सूर्य देव! तरस खाओ
तपन थोड़ी वापस ले लो
धरा पर जल बरसा कर,
थोड़ी सी तो राहत दे दो।
आयेगी बरसात  सुहानी,
अंबर से बरसे फिर पानी,
गर्मी से राहत  मिल जाये,
तरुवर पर आयेगी जवानी।।
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