Tuesday, June 16, 2020




मुक्तक ,

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1.
जिंदगी जीने का नाम होता है।
व्यर्थ में क्यों मानव समय खोता है।।
जिंदगी एक नौका की भांति है।
जिंदगी बर्बाद तो जन रोता है।।

2.
जिंदगी में सुख दुख आते हैं।
कभी तो दुख बहुत सताते हैं।।
जिंदगी लाती उतार चढ़ाव।
जन दुख सागर में बह जाते हैं।।
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सांझ-सबेरा
विधा-कविता
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सांसे इंसान की
होती है  सेवेरा,
कब होती सांझ
कुछ नहीं बेरा।

सांझ दुख रूप,
सुख है सवेरा,
फिर क्यों लगे,
जगत में डेरा।

दर्द देती सांझ,
खुशी दे सवेरा,
क्यों इतराता है
नहीं मेरा तेरा।

काम जन हित,
करते ही रहना,
जाकर प्रभु को
हिसाब भी देना।
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*होशियार सिंह यादव


कविता
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सता रही है गर्मी,
सूर्य बरतों नरमी,
हाल है बदहाल,
बदली जग चाल।

तप रही  है धरा,
मिटा हैं रंग हरा,
कृषक है इंतजार,
वर्षा धरा आधार।

आओ वर्षा रानी,
बरसा देना पानी,
किसान हो खुश,
करो न मनमानी।

वर्षा जग आधार,
करते लोग प्यार,
सूना है  आंगन,
आओ घर द्वार।।


 




दोहा 
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1.
जीवन सुख दुख नाव है, मिले उतार चढ़ाव।
खट्टे मीठे बोध से,    निखरे मन के भाव।।
2.
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मन की अच्छी सोच हो, बनते शुद्ध विचार।
नेक नियत से काम ले, मिले जहॉँ का प्यार।।
3.
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आनलाइन पढ़ा रहे,    देेते जग का ज्ञान।
गॉँवों में भी सेल से,    बन जाये  विद्वान।।

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