Wednesday, June 03, 2020

दोहा
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1
होरी की टोली चली, बिखरे रंग गुलाल।
भंग पिये बिन हो नशा, बुरा हो गया हाल।।   
2
गलत समय आहार ले, हो जाये बीमार।
चटनी, रोटी, दूध से,करो सदा ही प्यार।।
3
रस गिलोय पीयूष सम,तन का मिटे बुखार।
निस दिन काढ़ा पान कर,उर के हटें विकार।
  
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गीत-रामावतार
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दर्द मिटाओ धरा के, आओ एक बार,
दर्शन के हम प्यासे,  मेरे राम अवतार।।

त्रेता में तुम आए,  किया दुष्ट संहार,
संतों के तुम रक्षक, खूब मिला प्यार,
एक बार फिर आओ, करो जग उद्धार,
सुख ढूंढे ना मिले, जग दुख का आधार
दर्द मिटाओ................................
द्वापर में तुम आए, बने कृष्णावतार,
धरती को घेरे हुए, दुर्जन दुष्ट हजार,
पाप मिटे जग के, बढ़ जायेगा प्यार,
वरना संग में ले चलो,खड़े हुये तैयार,
दर्द मिटाओ................................
कलियुग का बुरा वक्त, पाप कर्म आधार,
अत्याचारी फिर बढ़े, नहीं रहा अब प्यार,
हाथ जोड़ हम खड़े, आओ फिर अवतार,
लौटा दो फिर से,  सतयुग वाला प्यार,
दर्द मिटाओ................................
त्राहि-त्राहि मची,जीवन हुआ बेकार,
दुख में जन हंस रहे, बना सुख व्यापार,
कोई सुनता है नहीं, नहीं कोई है यार,
राधा कृष्ण की जोड़ी, बनी थी युगधार,
दर्द मिटाओ..............................
दर्द मिटाओ धरा के, आओ एक बार,




दर्शन के हम प्यासे,  मेरे राम अवतार।।

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