विषय-पेड़
विधा-कविता
*************************************
*************************************
************************************
कर दो शृंगार धरा,
लगाओ पेड़ हजार,
पेड़ जीवन देते हमें,
कर लो इनसे प्यार।
लो मिलकर लगाये,
धरा पर बहुत पेड़,
बड़े हो गये पेड़ तो
करो न उनसे छेड़।
प्रयास अगर सफल,
आये सुनहरा दिन,
वरना इंसान से ही,
धरती जायेगी छीन।
***************
*होशियार सिंह यादव,
क्षणिकाये
*************
1.
सुनहरी होती हैं यादें,
कभी हंसाती तो कभी रुलाती,
कभी पास आती,कभी दूर जाती,
किसी को पास बुलाती,
कभी दिलों को तड़पाती।।
2.
दिल में बसाते कोई,
कोई उन्हें दूर भगाते,
दर्द कभी न खत्म हो
यादों में खो जाते,
यादें कभी तो,
दे जाती हैं जुदाई,
रो रोकर दिन बीते,
जग में हो हंसाई।
***************
-दुख/तकलीफ/गम
विधा-क्षणिकाये
*************
1.
कभी कभी दुख,
कर जाते हैं वो काम,
नहीं करे जीनेे को मन,
पर दे जाते पैगाम,
दुख के बाद सुख आते,
आये सुबह के बाद शाम।
2.
गम एक दरिया है,
बहकर चला जाये,
पर सुख भी तो कभी,
रुक नहीं पाये,
दुख रुलाये
तो सुख जग हंसाये।
***************
सास और बहू
विधा- पद्य
****************
सास बहू का झगड़ा छिड़ गया,
माइक की भांति वो जोर-जोर,
लोग इक_े हुए,मचा जब शोर,
सास ने पकड़ा झट बहू का कान,
घटा दी बस उसकी ही शान,
बोली-तुझे शर्म नहीं आती,तूझे
लगती हो जैसे बड़ी नादान,
बहू बोली- सासू जी, तुम भी तो नहीं कम,
मेरा कान पकड़ लिया, तूझ में बड़ा है दम,
सास ने कहा- सुधर जा अभी मौका है,
मैंने कितनी बार तुम्हें टोका है,
फिर भी नहीं मानी तो जड़ दूंगी एक थाप,
बेशक उल्टा सीधा हो कुछ आये तेरा बाप,
कहा- बहू ने सासू जी क्यों करती मुझको तंग,
तेरा बेटा काम नहीं करता रहता पड़ा मलंग,
उसको काम धाम नहीं तोड़ दिया है पलंग।
सुन ले सासू आज मेरी, मैं आ चुकी बड़ी तंग,
या तो मेरी बात मान ले वरना छेड़ दूंगी जंग।
सास बहू के बातों की लोगों ने हंसी उड़ाई
देख देख दोनों का झगड़ा सबने मौज उड़ाई,
फिल्मी दुनिया से कम नहीं करती दोनों हंसाई
बाहर तक भी बात फैली खूब चर्चा,
सास बहू के झगड़े का छपवा दिया पर्चा,
सास अगर उन्नीस थी तो बहू थी बीस,
बेटा उनका तेज था वो था इक्कीस,
झगड़ा खूब चला फिर भी नहीं मिटी टीस।
*******************
*होशियार सिंह यादव
विधा-कविता
*************************************
*************************************
************************************
कर दो शृंगार धरा,
लगाओ पेड़ हजार,
पेड़ जीवन देते हमें,
कर लो इनसे प्यार।
लो मिलकर लगाये,
धरा पर बहुत पेड़,
बड़े हो गये पेड़ तो
करो न उनसे छेड़।
प्रयास अगर सफल,
आये सुनहरा दिन,
वरना इंसान से ही,
धरती जायेगी छीन।
***************
*होशियार सिंह यादव,
क्षणिकाये
*************
1.
सुनहरी होती हैं यादें,
कभी हंसाती तो कभी रुलाती,
कभी पास आती,कभी दूर जाती,
किसी को पास बुलाती,
कभी दिलों को तड़पाती।।
2.
दिल में बसाते कोई,
कोई उन्हें दूर भगाते,
दर्द कभी न खत्म हो
यादों में खो जाते,
यादें कभी तो,
दे जाती हैं जुदाई,
रो रोकर दिन बीते,
जग में हो हंसाई।
***************
-दुख/तकलीफ/गम
विधा-क्षणिकाये
*************
1.
कभी कभी दुख,
कर जाते हैं वो काम,
नहीं करे जीनेे को मन,
पर दे जाते पैगाम,
दुख के बाद सुख आते,
आये सुबह के बाद शाम।
2.
गम एक दरिया है,
बहकर चला जाये,
पर सुख भी तो कभी,
रुक नहीं पाये,
दुख रुलाये
तो सुख जग हंसाये।
***************
सास और बहू
विधा- पद्य
****************
सास बहू का झगड़ा छिड़ गया,
माइक की भांति वो जोर-जोर,
लोग इक_े हुए,मचा जब शोर,
सास ने पकड़ा झट बहू का कान,
घटा दी बस उसकी ही शान,
बोली-तुझे शर्म नहीं आती,तूझे
लगती हो जैसे बड़ी नादान,
बहू बोली- सासू जी, तुम भी तो नहीं कम,
मेरा कान पकड़ लिया, तूझ में बड़ा है दम,
सास ने कहा- सुधर जा अभी मौका है,
मैंने कितनी बार तुम्हें टोका है,
फिर भी नहीं मानी तो जड़ दूंगी एक थाप,
बेशक उल्टा सीधा हो कुछ आये तेरा बाप,
कहा- बहू ने सासू जी क्यों करती मुझको तंग,
तेरा बेटा काम नहीं करता रहता पड़ा मलंग,
उसको काम धाम नहीं तोड़ दिया है पलंग।
सुन ले सासू आज मेरी, मैं आ चुकी बड़ी तंग,
या तो मेरी बात मान ले वरना छेड़ दूंगी जंग।
सास बहू के बातों की लोगों ने हंसी उड़ाई
देख देख दोनों का झगड़ा सबने मौज उड़ाई,
फिल्मी दुनिया से कम नहीं करती दोनों हंसाई
बाहर तक भी बात फैली खूब चर्चा,
सास बहू के झगड़े का छपवा दिया पर्चा,
सास अगर उन्नीस थी तो बहू थी बीस,
बेटा उनका तेज था वो था इक्कीस,
झगड़ा खूब चला फिर भी नहीं मिटी टीस।
*******************
*होशियार सिंह यादव




No comments:
Post a Comment