बलिदानी
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वीरों की भाषा, वीरों ने जानी।
पल में देे दी है,अपनी कुर्बानी।
वीर बलिदानी,ये देश बलिदानी,
कुर्बानी देकर, लिख गये कहानी।।
माथे से चूमा, है धरती मां को,
दुश्मन से लड़के,निशानी जहां को,
कुर्बानी उसकी, रंग एक लाई,
होने ना पाई, जग में हंसाई,
झंडे में लिपटी, हैं उनकी जवानी,
वीरों की भाषा.....................
मां के लिये भी, भेजा एक पत्र,
पढ़के सुनाये, उसका एक मित्र,
रो रो के गिरते, हैं आंसू मां के,
दर्द में डूबे हैं , जन जन जहां के,
आंसू न बहाते, होगी बेमानी।
वीरों की भाषा..................
कभी होता था, उनका भी घराना,
मातृभूमि ने भी, उनको पहचाना,
किस्मत का लेखा, कोई ना टारे,
दुनिया जब हारे, वीर नहीं हारे।
दुश्मन वो मारे, करते मनमानी।
वीरों की भाषा.....................
वीरों की भाषा, वीरों ने जानी।
पल में देे दी है,अपनी कुर्बानी।
वीर बलिदानी, देश बलिदानी,
कुर्बानी देकर, लिख गये कहानी।।
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*होशियार सिंह यादव
कुर्सी की माया
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कुर्सी की बड़ी माया
भेद कोई नहीं पाया,
जिसको मिल गई है
उसने दिल लगाया।।
कुर्सी एक बार मिले
हो जाए उसके दास,
बुरा हाल हो जाता है
जब नहीं उसके पास।
कुर्सी जब मिल जाये
बन जाते नेता अमीर,
वही ज्ञानी ध्यानी हो
बाकी सभी फकीर।
कुर्सी से बनते मंत्री
कुर्सी बनाती संतरी,
कुर्सी हो नेता जान
हो उस से पहचान।
कुर्सी गई जब कभी
मच जाता एक शोर,
जीना मुश्किल होता
नहीं मिलता उसे ठोर।
कुर्सी सदा हो पास
बनते सारे ही काम,
कुर्सी की सरकार है
कुर्सी बन जाये धाम।
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तेरी याद
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तेरी याद जब आती है।
दिल को बड़ा तड़पाती है।।
यादें तुम्हारी जब आये।
ये ऑँखें अति रुलाती हैं।।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
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तपने का गुण सोने से सीखों जो तपकर कुंदन बन जाता है। इंसान अगर सोने की तरह तप करें तो संत शिरोमणि बन सकता है।
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---होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा-
-सपना/ख्वाब/स्वप्र
विधा-मुक्तक
मापनी-22 22 22 22
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सोते हैं तो आते सपने।
सपने कभी नहीं हो अपने।।
कभी हॅँसाये कभी रुलाये।
सपने में पड़ते प्रभु जपने।
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*होशियार सिंह यादव
योग
विधा-मुक्तक
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1. (22 22 21)
योग भगाये रोग।
योग हो संजोग।।
पुरानी परंपरा।
रखेगा यह निरोग।।
2.(22 22 2 21)
रोगों को रखे निरोग।
कहलाता है यह योग।।
अस्वस्थ हो जाये जन।
रहे जो संलिप्त भोग।।
3:(22 22 21 2)
रोग से बच जायेगा।
सुंदर समय आयेगा।
योग करे हरदम सुबह।
खूब नाम कमायेगा।।
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*होशियार सिंह यादव





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