Saturday, June 20, 2020




जरा सुनो
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मातृभूमि की रक्षा का दायित्व सैनिकों के कंधों पर होता है जो कुर्बानी देकर मातृभूमि के साथ साथ देश एवं लोगों की सेवा करते हैं।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा--



नमन दोहा दर्पण

विधा-कुंडलियां
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योग से रोग दूर हो, रहे शरीर निरोग,
सुबह शाम करते रहे, पास न आये रोग।
पास न आये रोग, मन के हटेगा विकार,
महिमा इसकी जान, करते लोग हजार।
खाना पीना हो उचित, करो शाकाहार भोग,
नहीं बचेगा रोग,    करते रहना योग।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

दोहा
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1.
दिल में अपार जोश है, शौर्य गजब मिसाल।
दुश्मन की नजरें टिके, समझे अपना काल।।
2.
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रू
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सीने पर खा गोलियां, करे जान कुर्बान।
वीर जवानों से बढ़े, भारत मॉँ की शान।।
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*होशियार सिंह यादव


ग्रहण
विधा-सोदोका
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लगे ग्रहण
इंसान परेशान
खो देता बुद्धिबल
बुरा बीतता
कोई नहीं दे साथ
मंजिल पर चलता
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*होशियार सिंह यादव

एकांत और अकेलापन
विधा- कविता(पद्य)
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ऋषि मुनि और तपस्वी,
किया करते एकांत वास,
पाप दोष सभी नष्ट करते
लेते थे शुद्ध हवा- सांस।

लंबी उम्र पा  लेते थे वो,
जप तप में रहते थे लीन,
अपने पुण्य कर्मों के बल,
हित करते थे दीन व हीन।

अकेलापन उन्हें भाता था,
वर्षों तक तप में बीत जाए,
अपने सांसों  को रोक लेते
बुद्धि और बल  खूब पाये।

वर्तमान में चरवाहे भी अब,
घूमते रहते हैं वन जंगलों में,
खेतों में बैठकर खाना खाते
नहीं रुचि उनकी बंगलों में।

एकांत और अकेलापन जन,
पा जाते हैं जग का ही प्यार,
घूम घूमकर जग के खेतों में,
खुद पकाते हैं उतारते है हार।।
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स्वयं रचित, नितांत मौलिक रचना
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*होशियार सिंह यादव

 जीत ही जायेंगे हम
विधा- कविता
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युद्ध हो या तूफान हो
हम न किसी से कम
हिम्मत के हौसले हैं
जीत ही जाएंगे हम।

आसमान पकड़ लेंगे
हवा को जकड़ लेंगे,
समुद्र को पी जाएंगे
दुश्मन न बच पाएंगे।

हमारी उड़ान ऊंची
हमारे पंख निराले हैं
काल हमारा नाम है
हम देश रखवाले हैं।

आएगा हमारे सामने
मिला देंगे  मिट्टी में,
सीने पर मार कटार
चिट्ठी में लिख देंगे।
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*होशियार सिंह यादव

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