नाम
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1.
जो करवाते बाल से, छोटे मोटे काम।
दोषी वे हैं देश के, होत नाम बदनाम।।
2.
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धर्मयुद्ध होते कभी, हो जाता है न्याय।
प्रभु तब तब अवतार ले, रोके जग अन्याय।।
3.
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फुर्ती से भरपूर हो, नहीें गिलहरी काम।
बीज कुतर कर ले मजा,कृंतक प्राणी नाम।।
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आ अब लौट चलें
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जिस प्रकृति में हम पले,
आगे बढ़े, बढ़ते ही गए,
पाला पोसा, जीवन सधे,
आ अब लौट चलें।
जीवन दिया, सहारा दिया,
सुखदुख,जीवन प्यारा दिया,
नसीब था वो हमारा दिया,
आ अब लौट चलें।
जीवन सुंदर बने,प्यार मिले
आगे बढ़े और फूल खिले,
नाम कमाये, आगे ही बढे,
आ अब लौट चलें।
अजब छटा बिखेर रहा है,
प्रकृति का है अजब नजारा,
प्रकृति ने हमको है पुकारा,
आ अब लौट चले।
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*होशियार सिंह यादव
कलम/लेखनी
कविता
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कलम सदा ही चलती,
जगत का हाल लिखती,
वीरों की गाथा गाती है,
दुश्मन सिर कलम करती।
नेपोलियन ने लिखा है-
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मुझे डर नहीं तोप का,
डर नहीं है तलवार का,
बस मुझे तो डर लगता
कलम और अखबार का।
यह देखो कलम है मेरी,
नहीं रुकी है नहीं रुकेगी,
नहीं झुकी है नहीं झुकेगी,
सच्ची बात उजागर करेगी।
कलम का सिपाही होता
जग में पत्रकार कहलाता,
अपने गम छुपा लेता सदा
खुशी जग आभास कराता।
कलम का सिपाही होता,
नहीं कार है नहीं तलवार,
नारद को याद करता सदा
पास में रखता है अखबार।।
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