Friday, June 19, 2020



दोहा

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झुका दिया है चीन को, न झुका भारत वीर।
कीड़े जैसे मारते, शत्रु गला दे चीर।।


जरा सुनो-
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हकीकत को कल्पनाओं से नहीं बुना जाता अपितु सच्चाई के धागों से बुना जाता है जिसमें प्रत्येक धागा हीरे की भांति खरा और कठोर होता है।
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-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

नमन मंच,  

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1.
करो खूब जग में योग, होगा तनाव दूर।
मन से प्रसन्न जो रहे, खिलता आनन नूर।।

2.
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मन पर धुंध कभी पड़े, करता उल्टे काम।
धुंध करे हर साल ही, बहु जन काम तमाम।।
3.
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कण कण माटी में भरा, भारत वीर जवान।
तब ही कहते हैं सभी, लगता देश महान।।

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चलचित्र काव्य सृजन 

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दिल से दिल की राह है,
यह दो दिलों की चाह है,
मुरझाये चेहरे  हंॅँस उठते,
यूं दिलों में प्रेम अथाह है।

कभी हंसते हैं तो रोते हैं,
कभी सपने देख सोते हैं,
कभी तनहाइयों में गुजरते,
कभी प्रेम बीज बोते हैं।

रक्त दिलों में संचार करे,
सोये चिरनिद्रा से  जाग,
दिलों को छोटा न मानो,
बहुत लंबा होता है राग।

एक रोता  दूजा भी रोता
एक सोता दूजा भी सोता,
दर्द देखकर  नैन भिगोता,
हृदय को हृदय नेह होता।।
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होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01



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1. मापनी- 21 22 22 22 22,22,22
चलते हैं जब देशभक्त, उनकी अपनी शान है।
पूरे जग में देश की, अपनी एक पहचान है।।
क्या झुका सकेगा तूफान, ऐसे इन वीरों को ,
चलते दुश्मन छाती पर,लगते वे तूफान हैं।।

2.मापनी 21 22 22 22 22 22 22 2
तूफानों से लड़ते ही रहते, येे हैं भारत वीर।
दुश्मन सामने आ डटे, पल में देते उनको चीर।।
भरे हुए भावों से , देशभक्ति जज्बा भरा होता,
फौलाद बन खड़े होते हैं,समझो ना इन्हें फकीर।।
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*होशियार सिंह यादव


मुक्तक


1. मापनी- 21 22 22 22 22,22,22
चलते हैं जब देशभक्त, उनकी अपनी शान है।
पूरे जग में देश की, अपनी एक पहचान है।।
क्या झुका सकेगा तूफान, ऐसे इन वीरों को ,
चलते दुश्मन छाती पर,लगते वे तूफान हैं।।

2.मापनी 21 22 22 22 22 22 22 2
तूफानों से लड़ते ही रहते, येे हैं भारत वीर।
दुश्मन सामने आ डटे, पल में देते उनको चीर।।
भरे हुए भावों से , देशभक्ति जज्बा भरा होता,
फौलाद बन खड़े होते हैं,समझो ना इन्हें फकीर।।


विषय-चित्रलेखन
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अपना पथ आप बनाऊ,
खेलकूद घर पर में आऊं,
आसमान सतरंगी बादल,
अपनी कहानी मैं सुनाऊं।

हम छोटे पर हिम्मत है,
खुद की राह  बनाते है,
अपनी बुद्धि के बल से,
सारे जगत को हंसाते हैं।

आसमान को  छू लेंगे,
वो भी आये एक दिन,
शिक्षा, दीक्षा में निपुण,
जानते कला भिन्न भिन्न।

विज्ञान उन्नति करता है
हम बैठे नहीं मूक बन,
दो ज्ञान की शिक्षा भी,
उन्नति करे देश व जन।

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