चतुष्पदी
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धोखा देता चीन, वो रखे नाता नही।
भारत परेशान, उसे वो सुहाता नहीं।।
बासठ लड़ाई में धोखा दिया था उसे।
अब बुलावे पर कोई, चीन जाता नहीं।
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जरा सुनो
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एकांत में रहने की बजाय घुल मिलकर रहने वाले रोगों विशेषकर अवसाद से बच सकते हैं जो एक समस्या बनकर उभर रही है।
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पृथा
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मात रूप में पूजते, पृथा पड़ा है नाम।
अन्न,फूल,जल,धान देे, जनहित इसका काम।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
विश्वास
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डोर अटल विश्वास की, टिका हुआ संसार।
रिश्ते ,बंधन में बसा, प्रीत, रीत ,परिवार।।
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*होशियार सिंह यादव
पेड़
विधा-कविता
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कर दो शृंगार धरा,
लगाओ पेड़ हजार,
पेड़ जीवन देते हमें,
कर लो इनसे प्यार।
लो मिलकर लगाये,
धरा पर बहुत पेड़,
बड़े हो गये पेड़ तो
करो न उनसे छेड़।
प्रयास अगर सफल,
आये सुनहरा दिन,
वरना इंसान से ही,
धरती जायेगी छीन।
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*होशियार सिंह यादव,
कविता
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अपने को बड़ा समझे,
दूसरे का समझे हीन,
वो है पाप की मशीन,
उसे कहे पाक व चीन।
खुद तो हंसता रहता है,
दूसरों को बस रुलाये,
धूर्त वो इंसान कहलाये,
वो सीधा नरक में जाये।
जो दूसरे को माने मूर्ख,
खुद को माने होशियार,
वो जन धूर्त होता सदा,
करे ना किसी से प्यार।
जो मीठी बातेें करता,
पीछे से भरता है कान,
वो नर कुकरात सम है,
उसकी करो पहचान।
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*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा





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