Friday, June 12, 2020

रक्तदान
******
*********************************

*********************************
****************************
1.
इंसान की है शान।
रक्तदान पहचान।।
बचा देता जिंदगी,
रक्तदान है जान।।
2.
रक्तदान है महादान,
जानता है एक जहान।
रक्तदान करना जरूर,
रक्तदान बचाये जान।
 ************
स्वरचित मौलिक रचना।
********************
*होशियार सिंह यादव


दोहे
****************************



*****************************
1.
डर कोरोना बुरा है,    बाहर जाना भूल।
रोग कभी जन घेर ले, दर्द लगे ज्यों शूल।।
2.
पानी जीवन की सुधा, कहे इसे अनमोल।
नहीं बचे जब पास में, बेशक हर हर बोल।।
3
मित्र और धन पास में, जग में होता महान।
पाप,पुण्य को मान ले, जन की सच्ची शान।।
************************
क्षणिकाएं
**************
1.

जब देखे नेता कुर्सी,
बैठने की रखे आश,
मन ही मन सोचता,
कुर्सी होती पास।
2.
खाना पीना भूल जाये,
जनता में जोड़ता हाथ,
कुर्सी पाने की खातिर,
करे चिकनी चुपड़ी बात।
3.
कुर्सी की माया बड़ी,
नेता देख हर्षाता,
नहीं पास कुर्सी रहे
गम में डूब जाता।


कौन रोके से रुका
विधा- कविता

***************************
इंतजार था जिनका
न जाने वह कहां सो गए,
देख देख आंखें थक गई
जाने कहां खो गए।

दोस्त दे गए दगा
अपना भी अब नहीं सगा,
जीवन पहाड़  जैसा बना
बुढ़ापे में कैसा मजा।

आंधी गम की आती
जन को बहुत ही तड़पाती
किसको अपना दर्द सुनाएं
मन को बहुत सताती।

सोचा कोई हो अपना
बस बनकर रह गया सपना
कितने आए चले गए अब
प्रभु नाम को रटना।

जग बैरी हो चुका
जाने कहां वह दिन छुपा
शाम ढलने को आ गई
कौन रोके से रुका।।

No comments: