प्रताप
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चेतक घोड़े पर बैठ, पकड़ हाथ तलवार।
जीत सामने हो सदा, दुश्मन पर कर वार,।।
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*होशियार सिंह यादव
शान
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दौलत से इंसान की, बने नहीं पहचान।
ज्ञान,चरित्र कहलाते,जन जीवन की शान।।
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*होशियार सिंह यादव
दिल बार बार देता दुआएं।
अब दिल भी तेरे हवाले है।।
प्रकृति
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मन को विभोर करती,
मन को लुभाती प्रकृति ,
हरे भरे अति पेड़ पौधे,
जिनकी होती आकृति।
प्रकृति जीना सिखाती,
और खुशहाल रहे हम
प्रकृति सेवा नहीं करते,
इस बात का बहुत गम।
प्रकृति भी वरित करती ,
डार्विन का यही कहना,
प्रकृति से प्रेम कर लो,
प्रकृति में हमको रहना।
प्रकृति का करो शृंगार,
इसको कभी न करे नष्ट,
जो इससे खिलवाड़ करे,
प्रकृति देती उनको कष्ट।
अनेक तत्वों से बनी हुई ,
प्रकृति दे हमको जीवन ,
पौधो की करता पूजा जो,
जन जीवन बनता पावन।
मन को सदा हंसाती यह
मानव को रुलाती प्रकृति,
प्रकृति से नहीं करे प्यार,
प्रकृति का ऋण रहे उधार।।
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*होशियार सिंह यादव
कविता
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला
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कष्टों में नहीं हारने वाला, भाला लेकर चलने वाला,
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला।
दुश्मन सर कलम करने वाला,जीत सदा चाहने वाला,
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला।
देशद्रोही चुन चुन मारे, चेतक छलांग लगाने वाला,
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला।
कीका नाम से पुकारते थे, उदय सिंह का वो रखवाला
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला।
हल्दीघाटी युद्ध करने वाला, चेतक उनका हिम्मतवाला,
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला।
अकबर को धूल चटाने वाला, मेवाड़ का वह मतवाला,
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला।
भामाशाह धन देने वाला, मेवाड़ का वो पालनहारा,
मातृभूमि पर मिटने वाला शूरवीर था वो रखवाला।
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*होशियार सिंह यादव





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