Tuesday, May 05, 2020


आनंद के पल
विधा-छंद मुक्त
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कभी-कभी आता जीवन में,
सुंदर एक पल अति सुहाना,
चारों ओर गूंज उठे खुशियां,
मन में उठे मन भावन तराना,
आनंद के पल ना भूला पाते,
बीत जाता है पूरा ही जीवन
तन-मन पुलकित हो जाता है,
दिल में रह जाती एक लगन,
यह पल जीवन भर इंसान को,
भरे रखता खुशियों से तन मन,
बस यही वो सुहाना एक पल,
करता रहता जीवन भर मगन।।
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*होशियार सिंह यादव


भंवरा/ भौंरा/अलि
 पंचपदी
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आओ मिलकर एक बात करें।
दिनोंदिन हो रहा भेदभाव
करो ना अत्याचार,
गरीबों की सेवा करें
मिले जहां का प्यार,
सलामती सबकी चाहिए
रहे सभी सुखी
घर-घर में प्यार पले
नहीं रहे कोई दुखी।।
खुल कर कहो कोई ना डरे।

भंवरे मंडरा रहे फूलों पर।
बसंत ऋतु अब आई,
खुशियां है छाई।
हर टहनी पर हैं फूल,
साथ में हैं शूल।
कवि कर रहे कविताई,
ऋतु मन लुभाई।
प्रकृति ने हर फूल पत्ती
सुंदर अति सजाई।।
गीत गाएंगे अब झूलों पर।
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*होशियार सिंह यादव





मदद
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दीन हीन की मदद से, बनते बिगड़े काम।
पुनीत कर्म करनेे से, होगा जग में नाम।।

 सपना

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सपने बड़े हसीन हो
सपनों पर मत करो एतबार
सपने मिट्टी में मिलाए
सपने करवाएं जग में हार।
सपने सपने ही होते 
सपने हकीकत नहीं होते है
कभी सपने हंसाते हैं
कभी सपने खूब रुलाते है।
सपने जब भी आते
बढ़ जाए दिल में एक आश
मन में भर जाए उमंग
सपनों से बढ़ जाता विश्वास।
सपने में राजा बनता
सपने बना देते जन भिखारी
सपने को देख देख
सारी दुनिया इनसे ही हारी।
सपने की बात सुनाऊं
बड़े हसीन होते हैं ये सपने
सपने-सपने होते हैं
कभी नहीं होते हैं ये अपने,
सपने जब कभी आते
दिल को बड़ा ही तड़पाते
हकीकत यदि बने तो
इंसान जगत में खूब इतराते।
सपने सदा ही लो
हो बड़े ही हसीन सपने
सपने लेकर भूल जा
कभी नहीं होते वो अपने।


 सुनो
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जब बुरे दिन आते हैं, पराये तो क्या
अपने भी दूर हो जाते हैं। परंतु सुख के दिनों में वे भंवरे की तरह मंडराते हैं।
**होशियार सिंह यादव

 राशन
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भूख उदर की मिटेगी, जब राशन हो पास।
जब तक अन्न पेट नहीं, बंद हो जाए सॉंस।



 राशन
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भूख उदर की मिट जाए, जब राशन हो पास।
जब तक अन्न पेट नहीं, बंद हो जाए सॉंस।
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