रास
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कोविड रोगी बढ़ रहे, हो रहा जग विनाश ।
लॉक डाउन की राहत, नहीं आ रही रास।।
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*होशियार सिंह यादव
रास
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रोग जग में फैल रहा, कर रहा जन विनाश।
लॉकडाउन की राहत, नहीं आ रही रास।।
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*होशियार सिंह यादव
नदी
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सुधा कहिये नदी नीर, सोना उपजे खेत।
जल जीने को चाहिये,जल बिन कैसा रेत।।
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*होशियार सिंह यादव
नदी
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नदी नीर अमृत समान, सोना उपजे खेत।
जल जीने को चाहिये,जल बिन कैसा रेत।।
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*होशियार सिंह यादव
नदी नीर अमृत समान, सोना उपजे खेत।
जल जीने को चाहिये, स्वस्थ बनाए सेहत।
हे! जल देव प्रसन्न रखना, हे! सूर्यदेव दे उजाला,
सुबह उठकर करूं प्रणाम, मन मंदिर देवों की माला।
**होशियार सिंह यादव, कनीना
-प्रकृति
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मन को विभोर कर देती,
मन को लुभाती प्रकृति ,
हरे भरे बहुत पेड़ पौधे,
जिनकी होती है आकृति।
प्रकृति ने जीना सिखाया,
निर्भर रहते उन पर हम,
प्रकृति की सेवा नहीं करे,
इस बात का बहुत है गम।
प्रकृति भी वरित करती है,
डार्विन का भी यही कहना,
इस प्रकृति से प्रेम कर लो,
इस प्रकृति में हमको रहना।
प्रकृति का कर लो शृंगार,
प्रकृति को मत करना नष्ट,
जो प्रकृति खिलवाड़ करता,
प्रकृति उसे देगी जरूर कष्ट।
पांच तत्वों से बनी हुई यह,
प्रकृति होती हमारा जीवन ,
पेड़ पौधे लगा करे पूजा जो,
जन जीवन बन जाए पावन।
मन को सदा हंसाती प्रकृति,
जन को रुला डालती प्रकृति,
जो प्रकृति से नहीं करे प्यार,
प्रकृति का ऋण रहेगा उधार।।
पीपल,तुलसी, नीम
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पीपल में हैं देव गुण,
प्राणदायिनी देता हवा,
फल इसके ही खाकर,
रह सकते हैं जन जवां।
पीपल औषध का घर
कई रोगों में काम आए
दूरदराज से पक्षियों को
ठंडी पवन खूब सुहाये।
तुलसी घर में पूजा का
देता रहता एक संदेश
विष्णु भगवान का रूप
मिले भारत देश विशेष।
तुलसी दवाओं का घर
ईशान कोण इसे बसाय
चाय दूध में करो प्रयोग
जीवनभर तुलसी हसाय।
नीम कड़वा होता बहुत
देता है ठंडी ठंडी छांव
औषधियों से भरा हुआ
कौवे करते हैं कांव कांव।
तीनों पौधे बहुत ही शुभ
जब मिले घरों के पास
रोग दोष कोई बचे नहीं
पल में उनका हो नाश।।


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