हार कहां हमने मानी है
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हिम्मत कहां तुमने पहचानी है,
हार कहां हमने मानी है...........
लड़ती रहे मरते रहे, कोरोना को देंगे मात,
पीछे मत हटना तुम ,सभी देना हमारा साथ,
दाता भी कुछ दानी है,
हार कहां हमने मानी है....
चले गये वो दे गए दर्द बाकी हैं बस हमदर्र्द,
बस चलना हमको है, हवाएं चले गर्म सर्द,
यह दुनिया हमने पहचानी है,
हर कहां हमने मानी है........
हिम्मत मत हार जाना, मंजिल अभी बाकी है,
अभी खेल बहुत चलेगा, यह तो बस झांकी है,
कोरोना की यह मनमानी है,
हार कहां हमने मानी है...........
आएगा दिन सुनहरा, हट जाएगा जग से पहरा,
फिर आएंगे पुराने दिन, बंधेगा जीत का सेहरा,
लगता है दुश्मन जानी है,
हार कहा हमने मानी है.....
हौसले बुलंद हो ,जीत निश्चित होगी एक दिन,
भागेगा कोरोना अब, बाकी दिन ले अब गिन,
नई भोर हमने लानी है
हार कहां हमने मानी है..........
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*होशियार सिंह यादव
हाइकु
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1.
देश पुकारे,
आओ युद्ध मैदान,
अभी ना हारे।
2.
वीर हमारे,
चले रक्षा करने,
देश पुकारे।
3.
चलके द्वारे,
तेरा देश पुकारे,
सैनिक प्यारे।।
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नमन साहित्यगंगा
शब्द-हरि
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हरि हरते संताप जन, जग में है विश्वास।
प्रेम भक्ति दिल में पले, कष्टों का हो नाश।।
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*होशियार सिंह यादव
संपदा
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शिक्षा है संपदा बड़ी, बाटों बढ़ता ज्ञान।
जग से खाली जाएगा,क्यों नर है अज्ञान।।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
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मुंह मास्क, हाथ दस्ताने,
सोशल डिस्टेंस बनाएंगे,
कोरोना योद्धा बनकर के
लोगों की जान बचाएंगे।।
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-होशियार सिंह यादव,कनीना।
-प्रवासी
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गहरा दर्द छुपा रहे, बेचारे मजदूर।
कोरोना की मार से,प्रवासी नहीं दूर।।
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स्वरचित मौलिक रचना।
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*होशियार सिंह यादव
प्रवासी
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गहरा दर्द छुपा रहे, बेचारे मजदूर।
कोरोना की मार से,प्रवासी नहीं दूर।।
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*होशियार सिंह यादव
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