गजल
****************************
**************************
याद करते हैं तुमको
कभी तो दर्शन दे जाओ
किस हाल में रहते हो
कभी तो हमें बतलाओ,
बिछड़े कई साल हुए
पता नहीं तुम गए कहां
अब तक ढूंढ रहा पता
मालूम नहीं दर्द कहां,
तस्वीर तेरी देखकर
भुला लेते अपने गम,
बुला लेते तुम्हें
होते नहीं ये दर्द कम,
अपने दिल का दर्द
किसी से नहीं कहते हैं
कब आओगे बतला दो
हम यादों में बैठे हैं,
आओगे किसी दिन जरूर
मन यही कहता है
कहीं मिलोगे हमें
मन तलाश में रहता है,
जीवन के दिन चंद रहे
नहीं लगता आओगे
ढूंढते रहेंगे तुमको तो
तुम ही हमें तड़पाओगे,
अकेले हम बैठे हैं
याद तुम्हें कर लेते हैं
कभी तो कानों में आकर
कानों में ही कह जाओ
याद तुम्हें हम करते हैं
कब आओगे बतलाओ।
मधुमालती छंद
***************************
***********************
बहुत बड़ा है राम नाम,
भजने पर ना लगे दाम।
राम नाम दे जग उतार,
राम नाम लो नहीं हार।
दया/करुणा
*******************
***********************
दया जीव का मूल है
दया बिना जन बेकार
दया जिस दिल में हो
वह जन धरा आधार,
दया सील मानव को
नमन करना चाहिए
दया रहित इंसान के
पास कभी ना आइये,
दया, धर्म इंसान को
बनाते सदा बलवान
इन को अगर छोड़ दें
इंसान बनता है बेजान,
दया के चलते मां दिल
भरा मिलता भावों से
जिस दिल में दया नहीं
वह भर देता घावों से,
दया -धर्म का मूल है
दया जगत का आधार
दया जरूर ही राखिए
दया बिना नर बेकार।
*******************
******
धोखा देने वाला जन पाप का भागी तो होता ही है साथ में वह जीवनभर के लिए विश्वासपात्र नहीं बन सकता।
**
**होशियार सिंह यादव
मधुमालती छंद
*********
1.
लौ प्रभु से, अब जोड़ ले,
मोह परिजन, से तोड़ ले।
डर नहीं अब, जग छोड़ दे,
लोभ ना कर, धन छोड़ दे।
नैना
****************
नीर बहे जब नैन से, दिल का कहती हाल।
कड़वी बोली दुष्ट की, मन की बदले चाल।
********************
धैर्य
****
शुभ कर्म में धैर्य रख, एक दिन होगा नाम।
नीच कर्म में ख्याल कर, होगा जन बदनाम।।
**
****************************
**************************
याद करते हैं तुमको
कभी तो दर्शन दे जाओ
किस हाल में रहते हो
कभी तो हमें बतलाओ,
बिछड़े कई साल हुए
पता नहीं तुम गए कहां
अब तक ढूंढ रहा पता
मालूम नहीं दर्द कहां,
तस्वीर तेरी देखकर
भुला लेते अपने गम,
बुला लेते तुम्हें
होते नहीं ये दर्द कम,
अपने दिल का दर्द
किसी से नहीं कहते हैं
कब आओगे बतला दो
हम यादों में बैठे हैं,
आओगे किसी दिन जरूर
मन यही कहता है
कहीं मिलोगे हमें
मन तलाश में रहता है,
जीवन के दिन चंद रहे
नहीं लगता आओगे
ढूंढते रहेंगे तुमको तो
तुम ही हमें तड़पाओगे,
अकेले हम बैठे हैं
याद तुम्हें कर लेते हैं
कभी तो कानों में आकर
कानों में ही कह जाओ
याद तुम्हें हम करते हैं
कब आओगे बतलाओ।
मधुमालती छंद
***************************
***********************
बहुत बड़ा है राम नाम,
भजने पर ना लगे दाम।
राम नाम दे जग उतार,
राम नाम लो नहीं हार।
दया/करुणा
*******************
***********************
दया जीव का मूल है
दया बिना जन बेकार
दया जिस दिल में हो
वह जन धरा आधार,
दया सील मानव को
नमन करना चाहिए
दया रहित इंसान के
पास कभी ना आइये,
दया, धर्म इंसान को
बनाते सदा बलवान
इन को अगर छोड़ दें
इंसान बनता है बेजान,
दया के चलते मां दिल
भरा मिलता भावों से
जिस दिल में दया नहीं
वह भर देता घावों से,
दया -धर्म का मूल है
दया जगत का आधार
दया जरूर ही राखिए
दया बिना नर बेकार।
*******************
******
धोखा देने वाला जन पाप का भागी तो होता ही है साथ में वह जीवनभर के लिए विश्वासपात्र नहीं बन सकता।
**
**होशियार सिंह यादव
मधुमालती छंद
*********
1.
लौ प्रभु से, अब जोड़ ले,
मोह परिजन, से तोड़ ले।
डर नहीं अब, जग छोड़ दे,
लोभ ना कर, धन छोड़ दे।
नैना
****************
नीर बहे जब नैन से, दिल का कहती हाल।
कड़वी बोली दुष्ट की, मन की बदले चाल।
********************
धैर्य
****
शुभ कर्म में धैर्य रख, एक दिन होगा नाम।
नीच कर्म में ख्याल कर, होगा जन बदनाम।।
**
No comments:
Post a Comment