Sunday, May 17, 2020


पाप और पुण्य
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धरती अंबर रो रहे
बढ़ गया धरा पाप,
जन को जन डसता
जैसे हो काला सांप।
माता-पिता को कूटे
उसका अपना  खून,
बूढ़ी ममता मांग रही
रो गलियारों में चुन।
नंगा नृत्य बच्चा करे
मात-पिता के समक्ष,
तालियां बजा रहे हैं
भाई बनकर अध्यक्ष।
पश्चिमीकरण में डूबा
आधुनिकता का दौर,
कैसे बच पाए पृथ्वी
जब पाप बढ़े हैं घोर।
पुण्य कमा रहे आज
परहित में कुछ लोग,
दुखियों को हंसा रहे 
यह कैसा है संजोग।
कुछ पुण्य बोलबाला
कर रहे धर्म के काम
जिनके बल पर धरा
कमा रही है ना नाम।
पाप और पुण्य बीच
मची हुई है एक दौड़,
पाप हारेगा जरूर ही
जल्द आएगा वो दौर।
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*होशियार सिंह यादव



गीत सृजन
प्रदत्त पंक्ति- आप भी चल दिए
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सोचा था, बैठ करेंगे बात,
बैठे  नहीं, भूले मुलाकात,
प्रकृति ने सुनहरे पल दिए,
और आप भी चल दिए।
बुलाया था दूर से तुमको
आप आये, मुस्कुरा दिये,
खफा हुई, जो चल दिये
प्रश्र भी नहीं हल किये,
और आप भी चल दिए।
फिर  बैठेंगे, फिर आना, 
यह घर है जाना पहचाना
सब कुछ  हाजिर किया
और आप भी चल दिए।
और आप भी चल दिए।

*होशियार सिंह यादव








चिकित्सकों/ पुलिस/ शिक्षकों के सम्मान में अभिव्यक्ति
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भगवान से भी बढ़कर हो
जगत में डॉक्टर कहलाते
मौत से मरीज को छीनके
पृथ्वी लोक पर ले आते।
अन्याय कभी होता है तो
पुलिस करती उनका न्याय,
उनको करते हैं नमन सभी
रोते हुए को पुलिस हंसाय।
अंधेरे से निकाल प्रकाश में
जो जन शिष्य को ले जाए ,
हर समस्या का समाधान है
वो शिक्षक जग में कहलाए।
डॉक्टर, पुलिस और शिक्षक
सदा जगत में नाम कमाते हैं,
जब दिल से ये सेवा करते हैं
जन नहीं देव रूप कहलाते हैं।
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*होशियार सिंह यादव



सुनो
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कोई रोते जाता है, कोई रोते आता है।
जीवन की नैया में, दर्द बहुत सताता है।।
*  होशियार सिंह यादव,कनीना।



विषय-विश्वास
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टिका हुआ विश्वास पर, धरा और आकाश।
यौवन पर जब पाप हो, होगा जग का नाश।।
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विषय-शोषण
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शोषण पूरे चरम पर,भोग रहे हैं लोग।
दीमक भांति खा रहा, नहीं मिटेगा रोग।।

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