Friday, May 22, 2020

मजबूर
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1.
जग का इंसान मजबूर,
फिर भी करता है गरूर।
जब तक घमंड नहीं त्यागे
दिलों से हो जाता दूर।।
2.
कोरोना की मार पड़ी,
दर्द की आई एक घड़ी।
मजबूर हो गए अब सभी
समस्या जस की तस खड़ी।।

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वटवृक्ष
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सौभाग्य  को देने वाला
वट सावित्री व्रत कहाये,
वटवृक्ष की करलो पूजा
मनोंवांछित फल है पाये।

ज्येष्ठ माह की अमावस्या
वट, बरगद, पीपल पूजा,
करती रहे जीवन में नारी
इससे बड़ा ना काम दूजा।

सत्यवान सवित्री नमन है
जिनका नाम जगत अमर,
सावित्री ने करके वटपूजा
पति को छुड़ा लाई थी घर।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश बसते
वही वटवृक्ष कहलाता है,
पूजा इस दिन करने से ही
पति दीर्घायु फल पाता है।

गरीब स्त्री को करके दान
विधि विधान से व्रत करो,
साक्षात यम फिर आ जाये
मृत्यु भय से कभी ना डरो।
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जरा सुनो
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इंसान को उस वटवृक्ष की भांति जो जन जीवन के हितार्थ अपना पूरा जीवन बीता देता है। इसे कहते हैं काम भी बड़ा और नाम भी।
**होशियार सिंह यादव कनीना।

तूफान
 घिर जाये तूफान में, सूझे नहीं उपाय।
मरते दम लड़ते रहो, दाता बने सहाय।।
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*होशियार सिंह यादव

तूफान
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घिर जाये तूफान में, सूझे नहीं उपाय।
आखिरी दम प्रयास से , दाता बने सहाय।।
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*होशियार सिंह यादव



दूत
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कोरोना फैला हुआ, बना मौत का दूत।
जूझ भयानक रोग से,देश बना मजबूत।।




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