कविता
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दुश्मन ने घेरा है
चलों वीर हमारे,
कुर्बानी राह तके
तेरा देश पुकारे।
**
गोली खा सीने
आंखों के तारे,
खूब तू बहाना
तेरा देश पुकारे।
**
कायरता है बुरी
लो सोच विचारे,
तिरंगे की खातिर
तेरा देश पुकारे।
**
देशों में देश मेरा
देशभक्त हैं प्यारे,
नाम पूरे विश्व में
तेरा देश पुकारे।
********************
*होशियार सिंह यादव
मेहरबानी
गीत लेखन
*******
तू मेहरबान ह,ै तू मेहरबान ह
ै तेरी शक्ति हमारे प्राण है तू मेहरबान......
बच्चे थे बड़े हुए हैं, तू ने दिया सहारा
तेरे ही दम पर हममे जान है, तू मेहरबान....
सदा झुके थे सदा झुकेंगे, तू कद्रदान है
नीचे तेरे कदमों में झुके रहेंगे, तू मेहरबान....
प्राण भी तू हैं, धड़कन भी तू, तू निगेहबान है
दे दो सहारा हमको प्रभु तू मेहरबान....
*************
*होशियार सिंह यादव
नवल काव्य
************************
आग
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बरस रही
आग
आसमान है
लाल।
पंछी हुए
निराश
कठिन लेना
सांस।
कब आये
सावन
धरती होजा
पावन।
पानी की
कमी
झलक रही
प्यासे
जीव कहीं।
जिस दिन
ताड़ाग
भर जाये,
खुशी
जन जन पाये।
*************
जरा सुनो
*****
कमजोर, लोभी एवं रोगी की मन की स्थिति स्थिर नहीं होती। वे पल पल में बदलते रहते हैं।
***
होशियार सिंह यादव, कनीना
छल
******
छल की चादर ओढ़ के, मन में रखता पाप।
छलिया वो नर रूप में, उससे अच्छा सॉँप।।
*होशियार सिंह यादव
मुसीबत
*****
मुसीबतों से खेलता, मिलते कष्ट हजार।
दुख नाम से दूर हटे,वो जीवन बेकार।।
**
*होशियार सिंह यादव
छल
छल की चादर ओढ़ के, मन में रखता पाप।
छलिया वो नर रूप में, उससे अच्छा सॉँप।।
मुसीबत
मुसीबतों से खेलता, मिलती खुशी हजार।
वहीं जीवन होत सफल, करे दुखों से प्यार।।
मुझे बहकाना छोड़ दे,या दिल लगाना छोड़ दे।
प्यार करना सीख लिया है,तो शर्माना छोड़ दे।।
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दुश्मन ने घेरा है
चलों वीर हमारे,
कुर्बानी राह तके
तेरा देश पुकारे।
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गोली खा सीने
आंखों के तारे,
खूब तू बहाना
तेरा देश पुकारे।
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कायरता है बुरी
लो सोच विचारे,
तिरंगे की खातिर
तेरा देश पुकारे।
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देशों में देश मेरा
देशभक्त हैं प्यारे,
नाम पूरे विश्व में
तेरा देश पुकारे।
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*होशियार सिंह यादव
मेहरबानी
गीत लेखन
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तू मेहरबान ह,ै तू मेहरबान ह
ै तेरी शक्ति हमारे प्राण है तू मेहरबान......
बच्चे थे बड़े हुए हैं, तू ने दिया सहारा
तेरे ही दम पर हममे जान है, तू मेहरबान....
सदा झुके थे सदा झुकेंगे, तू कद्रदान है
नीचे तेरे कदमों में झुके रहेंगे, तू मेहरबान....
प्राण भी तू हैं, धड़कन भी तू, तू निगेहबान है
दे दो सहारा हमको प्रभु तू मेहरबान....
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*होशियार सिंह यादव
नवल काव्य
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आग
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बरस रही
आग
आसमान है
लाल।
पंछी हुए
निराश
कठिन लेना
सांस।
कब आये
सावन
धरती होजा
पावन।
पानी की
कमी
झलक रही
प्यासे
जीव कहीं।
जिस दिन
ताड़ाग
भर जाये,
खुशी
जन जन पाये।
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जरा सुनो
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कमजोर, लोभी एवं रोगी की मन की स्थिति स्थिर नहीं होती। वे पल पल में बदलते रहते हैं।
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होशियार सिंह यादव, कनीना
छल
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छल की चादर ओढ़ के, मन में रखता पाप।
छलिया वो नर रूप में, उससे अच्छा सॉँप।।
*होशियार सिंह यादव
मुसीबत
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मुसीबतों से खेलता, मिलते कष्ट हजार।
दुख नाम से दूर हटे,वो जीवन बेकार।।
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*होशियार सिंह यादव
छल
छल की चादर ओढ़ के, मन में रखता पाप।
छलिया वो नर रूप में, उससे अच्छा सॉँप।।
मुसीबत
मुसीबतों से खेलता, मिलती खुशी हजार।
वहीं जीवन होत सफल, करे दुखों से प्यार।।
मुझे बहकाना छोड़ दे,या दिल लगाना छोड़ दे।
प्यार करना सीख लिया है,तो शर्माना छोड़ दे।।


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