Monday, May 04, 2020


छंद 

******************
*********************************
**********************************
राम नाम रटते रहने से, जीवन में बन जाए काम।
मेहनत से नहीं जी चुराते,होता बड़ा जग में नाम।
काम से जी चुराते रहते, उनको कोई समझाओ
बेकार बैठो लगता बुरा,हो जाएगी एक दिन शाम।
*****************
*होशियार सिंह यादव



विषय-मजदू, श्रमिक, कामगार
*****************************

*********************************
पेट बदन में छुपा हुआ, धन कोसो है दूर।
शोणित मुंह पर चमक रहा, कहलाता मजदूर।।
****
श्रमिक धरा पर दुखी आज,नजर आए निज हार।
भूख प्यास में कर गुजर,  धन मिले ना उधार।।
***
बोझ श्रम से मरा जाए, वो हो कामगार।
सोता नहीं वो दिन रात,फिर भी मिलती हार।।
*होशियार सिंह यादव





जरा सुनो

**************************

 जन्म लेकर पाप कर्म नरक समान है, परहित में जीए वो जन महान है।

********************
*होशियार सिंह यादव



  भावना
******
मात पिता हो देव समान, कर सदा चरण स्पर्श।
जाग उठे ये भाव तो , मन में हो एक हर्ष ।।
*******************

  सुगंध
******
फूल कली का प्यार देख, भ्रमर खुश हो जाए।
मधुर मधुर रस पान कर, सुगंध मन पर छाए।
*******************







जरा सुनो
******
धोखा देने वाला जन पाप का भागी तो होता ही है साथ में वह जीवनभर के लिए विश्वासपात्र नहीं बन सकता।
**

बचपन
***************************

****************************
****************************


सुंदर सुहाने होते दिन
कहलाता वह बचपन
जीवनभर ना भूल पाते
चाहे उम्र हो जाए 55,
कभी आंगन,गलियारे
कभी मंदिर गुरुद्वारे में
खाते पीते हंसते खेलते
घर, आंगन, चौबारे में
ना कोई चिंता होती है
नहीं होता कोई दुख दर्द
जो मन में आया करते
मौसम गर्मी हो या सर्द,
फूलों कलियों से महके
बचपन सुहाना है प्यारा
हर दिल में बस जाते हैं
होता जहान बड़ा न्यारा,
थोड़े दिन के यह सुहाने
बीत जाएंगे ये पल में ही
रोते-रोते गुजरेगा जीवन
वो बातें बस दिल में ही








No comments: