Friday, May 15, 2020

मुक्तक
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     एक
वक्त पर साथ दे वो यारी
यारी सब को लगती प्यारी
घर पर दोस्ती निभाती जो
वो कहलाती सुंदर नारी।
     दो
दोस्ती वो जो दुनिया जाने
दोस्ती अपनों को पहचाने
वो मौकापरस्ती कहलाता
जो दोस्ती पर देता ताने।
     तीन
यारी दोस्ती एक हो बंधन
यारी दोस्ती होती चंदन
जब सच्ची यारी टूटती है
दोनों तरफ होती है क्रंदन।

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*होशियार सिंह यादव







 मुक्तक 

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कितने ख्वाब सजाकर आयी, बैठी राह निहारे पिय की।

हर आहट पर धक धक करती,धड़कन बेकाबू है हिय की।

प्रणय मिलन का प्रथम सुअवसर जाने क्या होगा रब आगे,
बहुत तड़प रहे हैं मिलन को, कोई तो आकर सुने जिय की।
 


परिवार दिवस
कविता

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मिलजुल कर बने
घर में परिवार
कभी खुशी,कभी गम
चलते हैं लगातार।
एक अकेले जन से
नहीं बनेगा परिवार
हम - तुम मिलते हैं
बढ़ जाता यह संसार।
छोटा है या बड़ा है
सभी होते परिवार
बड़े दिलवाला होता
करे जगत से प्यार।
टुकड़ों में बट गए
आज के परिवार
नहीं कोई सफलता
मिलती बस हार।
परिवार से बढ़कर
जग में नहीं नाता
परिवार में मां बाप
बहन और भ्राता।
एकल परिवार होते
अब हैं विघटित
आगे क्या होगा अब
वो जाने बस रब।
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 सुनो
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जगत में रोना सरल है किंतु हंसना बहुत कठिन है। यही कारण है कि लोग हंसते कम हैं और बात बात पर रोकर दिखाते हैं।
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  होशियार सिंह यादव, कनीना, हरियाणा





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विषय-तीर
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दशरथ की चिंता बढ़ी, श्रवण उर लगो तीर।
प्राण तजे सुन मॉं बाप, छोड़ दियो सब नीर।।
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विषय-तीर
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दशरथ की चिंता बढ़ी, श्रवण उर लगो तीर।
प्राण तजे झट मॉं बाप, छोड़ दियो सब नीर।।
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    *होशियार सिंह यादव

विषय-तीर
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दशरथ मन उदास खड़े, श्रवण उर लगो तीर।
मॉं बाप झट प्राण तजे, छोड़ दिया सब नीर।।
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    विषय-भीड़
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कोरोना को देखकर, छटती जाये भीड़।
जान बचे लाखों मिले, छूटे बेशक नीड़।।
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तीर

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दशरथ मन उदास खड़े, श्रवण उर लगो तीर।
मॉं बाप झट प्राण तजे, छोड़ दिया सब नीर।।
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