नवतपा(नौतपा)
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सूरज गर्मी वेग पर, नहीं मिले आराम।
तप रही नौतपा धरा, करे नहीं दिल काम।।
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*होशियार सिंह यादव
जीवन
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प्रभु के आधीन रहकर, समझ रहा धनवान।
उसकी महिमा जान ले, जीवन बने श्मशान।।
देवता
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सूरज होता देवता, देता जगत प्रकाश।
जीवन की रक्षा करे,करता रोग विनाश।।
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*होशियार सिंह यादव
व्यथा....मध्यम वर्ग की
विधा -पद्य
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अमीरों को के पास धन,गरीबों के सरकार साथ ,
मध्यम वर्ग बुरा पिटा है,कट गये दोनों ही हाथ।
कोरोना की मार पड़ी जब,रोजगार तक हुये बंद,
हाथ पर हाथ धरे बैठा है,कैसे हो आवाज बुलंद।
गरीबों को मिली सहायता,अमीर के पास है धन,
मध्यम वर्ग करे काम धंधा, दर्द से कराहाता मन।
उद्योग धंधे हो चुके हैं,मध्यम वर्ग का नहीं कसूर,
मध्यम वर्ग का छिना सहारा,सपने हुये चकनाचूर।
सबसे ज्यादा परेशान आज,कहलाता वो मध्यम वर्ग,
व्यथा मध्यम वर्ग की जानों,बना उसका जीवन नरक।
भीख मांगता हिचकिचाए, अपनी व्यथा किसे बताये,
यूं ही कोरोना चलता रहा,लॉकडाउन से राम बचाये,
जल्दी से कोरोना मिट जा,वरना मध्यम वर्ग हो विलुप्त,
सरकार प्रभु भरोसे चलती,जागे नहीं बस रहे सुप्त।।
****************
*होशियार सिंह यादव
विरासत का हौसला
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धरती, अंबर और पानी
मिली हमें एक जिंदगानी,
हौसला मिला है उपहार
प्रकृति से हमको है प्यार।
विरासत के हैं वायु जल
इन्हें कभी न करो खराब
जब तक जीये प्रयोग करे
सुनों हे साथी,सुनो जनाब।
प्रकृति है अनमोल उपहार
करो सदा प्रकृति से प्यार,
विरासत में मिली आजादी
कुर्बानी के लिए रहो तैयार।
विरासत का मिला हौसला
होने न पाये कभी यह कम,
भरों कूट-कूट कर देशभक्ति
दुश्मन घबरा जाये देख दम।
धरती, अंबर और सभी तारे
प्रकृति के कहलाते हैं नजारे,
इनकी सुरक्षा निज अधिकार
इन्हें बचाने को रहना तैयार।।
दिल
***
दिल ना दुखाओ किसी का,
बसता है जन भगवान,
हर जन को ले साथ चले,
वो देव तुल्य है महान।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना**
और का ही मचा है शोर।
पूरा न हो बेशक हो भोर।।
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सूरज गर्मी वेग पर, नहीं मिले आराम।
तप रही नौतपा धरा, करे नहीं दिल काम।।
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*होशियार सिंह यादव
जीवन
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प्रभु के आधीन रहकर, समझ रहा धनवान।
उसकी महिमा जान ले, जीवन बने श्मशान।।
देवता
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सूरज होता देवता, देता जगत प्रकाश।
जीवन की रक्षा करे,करता रोग विनाश।।
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*होशियार सिंह यादव
व्यथा....मध्यम वर्ग की
विधा -पद्य
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अमीरों को के पास धन,गरीबों के सरकार साथ ,
मध्यम वर्ग बुरा पिटा है,कट गये दोनों ही हाथ।
कोरोना की मार पड़ी जब,रोजगार तक हुये बंद,
हाथ पर हाथ धरे बैठा है,कैसे हो आवाज बुलंद।
गरीबों को मिली सहायता,अमीर के पास है धन,
मध्यम वर्ग करे काम धंधा, दर्द से कराहाता मन।
उद्योग धंधे हो चुके हैं,मध्यम वर्ग का नहीं कसूर,
मध्यम वर्ग का छिना सहारा,सपने हुये चकनाचूर।
सबसे ज्यादा परेशान आज,कहलाता वो मध्यम वर्ग,
व्यथा मध्यम वर्ग की जानों,बना उसका जीवन नरक।
भीख मांगता हिचकिचाए, अपनी व्यथा किसे बताये,
यूं ही कोरोना चलता रहा,लॉकडाउन से राम बचाये,
जल्दी से कोरोना मिट जा,वरना मध्यम वर्ग हो विलुप्त,
सरकार प्रभु भरोसे चलती,जागे नहीं बस रहे सुप्त।।
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*होशियार सिंह यादव
विरासत का हौसला
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धरती, अंबर और पानी
मिली हमें एक जिंदगानी,
हौसला मिला है उपहार
प्रकृति से हमको है प्यार।
विरासत के हैं वायु जल
इन्हें कभी न करो खराब
जब तक जीये प्रयोग करे
सुनों हे साथी,सुनो जनाब।
प्रकृति है अनमोल उपहार
करो सदा प्रकृति से प्यार,
विरासत में मिली आजादी
कुर्बानी के लिए रहो तैयार।
विरासत का मिला हौसला
होने न पाये कभी यह कम,
भरों कूट-कूट कर देशभक्ति
दुश्मन घबरा जाये देख दम।
धरती, अंबर और सभी तारे
प्रकृति के कहलाते हैं नजारे,
इनकी सुरक्षा निज अधिकार
इन्हें बचाने को रहना तैयार।।
दिल
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दिल ना दुखाओ किसी का,
बसता है जन भगवान,
हर जन को ले साथ चले,
वो देव तुल्य है महान।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना**
और का ही मचा है शोर।
पूरा न हो बेशक हो भोर।।


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