Saturday, May 02, 2020





सताता है कोरोना
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बहुत सताता है कोरोना
चहुं और पड़ा है रोना
बहुत सताता है कोरोना
बहुत सताता है कोरोना...
बंद पड़े हैं फैक्ट्री उद्योग
दुखी हो चले सारे लोग
नहीं मिले बढिय़ा खाना
घर से बाहर नहीं जाना
भूल गए है नहाना धोना
बहुत सताता है कोरोना....
लोगों की गई कई जान
भूले हैं जन अपनी शान
गरीब हो या हो धनवान
सभी बचाते अपनी जान
अब बस घर में हो सोना
बहुत सताता है कोरोना.....
स्कूल, कालेज सभी बंद
जीवों की पड़ी गति मंद
कोरोना की धाक बुलंद
मन में छिड़ा हुआ है द्वंद्व
बुरा रोग है नहीं खिलौना
बहुत सताता है कोरोना.......
मास्क लगी हर मुंह पर
बच्चे बूढ़े छुपे सभी घर
बस सबको लगता है डर
बोल रहे मिलकर हर हर
दुश्मन लगता है बिछौना
बहुत सताता है कोरोना....
बहुत सताता है कोरोना।।

*होशियार सिंह यादव



ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ सै--
यो कोरोनो सतावै सै
ये फैलतो ही जावै सै
कुछ तो जत्न बना लै
मैने रोग सै बचा लै,
जै लगगो मैन्नै,मरूंगी
मैं कुछ भी ना करूंगी
तू भी तो ना बचागौ
तू भी तो संग मरागौ।
ताऊ बोला ताई सै---
अपणा गांव में कहावत सै
साथ मरांगा साथ जिवांगा
जब लग जीवा सा 
तब लग साथ जीवांगा
अर मरगै तो फेर
साथ ही मरांगा,
इतणा बुरा मत सोच
दोनो घर मैं छुपरा सा
यूंही तो दोनों बचरा सा,
अपणी जिंदगाणी बहौत सै
स्याणी क्युं मन मै पछतारी सै
जमकै जीवांगा दोनों जणा
अभी मौत ना आरी सै।

*होशियार सिंह यादव








अपना प्यारा भारत

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सब देशों का सरताज
नमन इसको शत शत
सभ्यता से  भरा हुआ
ये अपना प्यारा भारत,
वीरों की खान होता है
दुश्मन की करता दुर्गत
बड़े बड़े वीर यहां हुए 
ये अपना प्यारा भारत,
दूध दही का हो खाना
नहीं कोई लोगों में लत
गोपालक देश अपना है
यह अपना प्यारा भारत,
काम मिलके पूरा करते
हो जाते जब सर्वसम्मत
शुद्ध जुबान के साथी है
अपना प्यारा यह भारत,
नहीं मिले कोई बैरभाव
करते प्रणाम ये शत-शत 
मेहमान का आदर करते
यह अपना प्यारा भारत,
समृद्ध अन्नदाता देवभूमि
देवों का चलता सदा रथ
कभी नहीं दर्द दे पाएगा
यह अपना प्यारा भारत।

*होशियार सिंह यादव


मां की ममता
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मां की प्यारी ममता को
कभी नहीं  भूला पाएंगे,
जब भी चर्चा हो मां की
हम नतमस्तक हो जाएंगे,
जब लेते नाम ममता का
पनपता मन में एक प्यार
मां की ममता सदा रहेगी
कुर्बान उसे जिंदगी हजार,
आह, मां ने जन्म दिया है
पाला पोषा बड़ा किया है
ममता की वो मूर्त होती है
दिल पर दुख दर्द सहा है,
ममता के आगे नतमस्तक
लुटाती मां  इसे जीवनभर
चाहे प्राण न्यौछावार होते
प्राणों का मां को नहीं डर,
लाखों सलाम उस मां को
जिसमें ममता  भरी अपार
ना चुकता ममता का ऋण
प्रणाम मां को लाखों बार।।

*होशियार सिंह यादव


 मिलना बहुत जरूरी है
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दर्शन नहीं होते प्रभु के
मन की इच्छा अधूरी है
लाख पुकार रहा उनको
मिलना बहुत जरूरी है...
फूलों,पत्तों में ढूंढ रहा हूं
हर कली को पुकारा है
गली राह भटकता फिरा
कोई ना लगता हमारा है
तड़पने की भावना पूरी है
मिलना बहुत जरूरी है.....
धर्म किए कुछ कर्म किए
परहित में दुख-दर्द लिए
दर्शन खातिर दर दर घूमा
जहर गमों के जमकर पिए
हो प्रभु प्रशंसा भूरि भूरि है
यूं मिलना बहुत जरूरी है.....
धर्मस्थलों की करके यात्रा
दर दर भटका पर्वत जंगल
जब प्रभु के दर्शन हो जाए
वो दिन हो शुभ और मंगल
बस  प्रभु के सपने नूरी हैं
यूं मिलना बहुत जरूरी है......
केदारनाथ और काशी घूमा
मंदिर गुरुद्वारों का द्वार चूमा
कभी पानी जैसा पतला लगे
कभी लगे आकार सूरजनूमा
उसके दर्शन लगते अंगूरी है
यूं मिलना बहुत जरूरी है......
तप करते करते  लाल हुआ
तन का कितना बेहाल हुआ
एक बार तो प्रभु संकट हरो
दिन रात मांगते मिलके दुआ
सिका तन ज्यों रोटी तंदूरी है
अब मिलना बहुत जरूरी है।।

*होशियार सिंह यादव


 वो जमाना
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आह! वो गुजरा जमाना
लाख पुकारों नहीं आता
बैठकर सोचता पछताता
कैसे उसे वापस बुलाता,
भोलेभाले चेहरे होते थे
दौड़ते,खेलते,खाते-पीते
नहीं परवाह कोई करते
अपनी अदाओं में जीते,
याद है स्कूल वाले दिन
बस्ता पीठ  पर ले जाते
तख्ती कलम दवात रख
छुट्टी होने पर घर आते,
गेम,टेम, हाकी, खुलिया
खेलते थे कितने ही खेल
बेशक लड़ते रहते सभी
किंतु दिलों में होता मेल,
कभी गुल्ली डंडा खेले
कभी खेले झिरनी-डंका
कभी तो पके चने भुनते
जला देते मिलकर लंका,
आपस में डुकम डुक्का
कभी जड़ते मुंह मुक्का
कभी तो नकल बाप की
पीते थे छुप छुपके हुक्का,
होमवर्क जब नहीं करते
धुन देते  शिक्षक जमकर
मां-बाप को नहीं बताते
स्कूल सजा की शर्म कर,
गलियों में जमकर खेले
घर में कभी ना रुकते थे
मेहमान कभी घर आता
अदब से समक्ष झुकते थे,
बस झटके से बीत गए हैं
उन्हें कैसे हम भूल पाएंगे
बस बीते दिन याद करते
वो लौटके कभी न आएंगे।

*होशियार सिंह यादव



ममता
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जब लेते नाम ममता का
पनपता मन में एक प्यार
मां की ममता सदा रहेगी
कुर्बान उसे जिंदगी हजार,
आह, मां ने जन्म दिया है
पाला पोषा बड़ा किया है
ममता की वो मूर्त होती है
दिल पर दुख दर्द सहा है,
ममता के आगे नतमस्तक
लुटाती मां  इसे जीवनभर
चाहे प्राण न्यौछावार होते
प्राणों का मां को नहीं डर,
लाखों सलाम उस मां को
जिसमें ममता  भरी अपार
ना चुकता ममता का ऋण
प्रणाम मां को लाखों बार।।

*होशियार सिंह यादव

अंतिम लड़ाई
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कोरोना अधमरा पड़ा है
लडऩी है अंतिम लड़ाई
कोरोना के योद्धाओं की
हर जगह हो रही बड़ाई,
कोरोना ने बहुत दर्द दिए
गम देखकर यह जाएगा
इतनी मार पड़ेगी इसको
लौट कर कभी न आएगा,
कोरोना से युद्ध करने को
कितने वीर खड़े हैं तैयार
पग पग पर पहरा देते  हैं
नहीं मानते कभी भी हार,
कोरोना से लड़कर जीता
वह महानायक कहाएगा
देखना जरूर भारत जरूर
विश्वभर में नाम कमाएगा।

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