Wednesday, May 06, 2020

सुनो
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इंसान अपने कपड़ों, चेहरे, धन दौलत एवं ऐश आराम से नहीं अपितु उसमें कितने गुण है, इस बात से पहचाना जाता है।
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सच और झूठ
विधा-दोहा लेखन
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              1.
सच कड़वा होता बहुत, करे बड़ी ही मार।
झूठा जन डर जाएगा,  होगी उसकी हार।।
               2.
झूठ कभी ना जीतता, कितने दे प्रमाण।
सच वो गंगाधार है, बसते दिल में प्राण।।
               3.
झूठ संग चलता अगर, खो जाता सम्मान।
गिरावट पर चला जाए, जन जाता है ज्ञान।
                 4.
सच सामना ना होगा, करो लख चतुराई।
झूठ सदा ही हारता, जग में हो हॅंसाई।।
                5.
झूठ सच में द्वंद्व छिड़ी, जीतेगा अब कौन।
सच सामने झूठ सदा, हो जाता है मौन।।
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*होशियार सिंह यादव



तन
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जोश भरा है तन अगर, नहीं माने नर हार।
डरकर दूर न भागता , मिले जगत का प्यार।
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*होशियार सिंह यादव




गर्दिश
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गर्दिश में है देश अगर, कोरोना की मार।
बुलंद इरादे रखो सदा, कभी नहीं हो हार।
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*होशियार सिंह यादव







पूनम का चांद
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पूनम का चांद
रहता सदा याद
जीवन बदलता
करते हैं इमदाद,
पूनम का चांद देखकर
हो जाता है जन विभोर
क्या सुंदर मुखड़ा होता
मचा हुआ है एक शोर,
पूरा चांद दिखाई दे
लगे चांदी सा रूप
देख देख इंसान की
बढ़ जाती एक भूख,
पूनम के चांद की तारीफ
करते रहते हैं जन सभी
क्या गजब की रात हो
आसमान में आए कभी,
पूनम की रात
रहे सदा साथ
दिल की बात
ना हो अनाथ,
पूनम की रात तो रात है
करती धन की बरसात है
खुशियां ही खुशियां छाए
पूनम चांद जिसके साथ है।
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*होशियार सिंह यादव

 जीवन/जिंदगी
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जीवन के रूप अनेक
आते हैं कर एक एक
जिंदगी एक बड़ा मजा
धीरे-धीरे जीकर देख।
कभी जिंदगी हंसाती है
कभी जिंदगी रुलाती है
जिंदगी किस मोड़ जाए
यह कभी ना बताती है।
जिंदगी में बहुत सुख है
जिंदगी में अति दुख  है
कैसे-कैसे रूप दिखाती
इसके अनेक मुख भी हैं।
जिंदगी भर कुछ आते हैं
दुख भोग भोग चले जाते
कुछ के घर में मिले सुख
जीवन भर उनको हंसाते।
जिंदगी बना देती है राजा
जिंदगी बना देती भिखारी
जिंदगी के रूप अनेक हो
अनेकों होती व्यथा हमारी।

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