Sunday, May 10, 2020

मां
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नहीं लिख पाए ऋषि मुनि
मां एक नाम अति विशाल,
लिख-लिख हार गए कवि
नहीं सुना पाए मां का हाल।

सबसे बड़ी वो धन दौलत
हीरे जवाहरात चाहे हजार,
मां ममता की झलक आगे
सब कुछ लगता है बेकार।

सब धर्मों में सब कर्मों में
इससे बड़ी नहीं कोई शान ,
सारी धरा पर लिख डालो
मां की होती बड़ी पहचान।

समुद्र से भी गहरी होती है
आकाश से ऊंची होती मां
मां की ममता  के आगे तो
लगता शून्य सारा यह जहां।

सूर्य, चंद्रमा लगते हैं फीके
जब मां की वो ममता जागे,
मां-ममता से  बिछड़े बच्चे
समस्त जगत ये फीका लागे।

तीनों लोक भी छोटे पड़ते
मां का दिल होता विशाल,
मां की आशीर्वाद के आगे
शून्य हो जाता है महाकाल।

मां तेरी ममता सदा बने यूं
चाहे हम भूखे ही मर जाए ,
धन दौलत बेशक ना मिले
तेरा आशीर्वाद सर्वदा पाए।

खुशियों से दामन भर जाता
जब ममता को सम्मुख पाते,
मां से बढ़कर कुछ नहीं हो
देव मुनि जन बस ये बताते।
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*होशियार सिंह यादव


मां
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मां जगत में नाम बड़ा
इसके आगे सारे फीेके
मां से प्यारी नहीं मूर्त
सारा जगत बौना दिखे,
हर कष्ट में याद आती
ममता की मूर्त कहलाए
जहां भी जीव रहता है
अनायास मां याद आए,
जीवन कर दे न्यौछावर
मां कहाती अनमोल है
सारे जहां की दौलत भी
मां का ना कोई मोल है,
सुख हो या कोई विपत्ति
मां की पहले याद आती
एक बार मां  से कह दो
सारी खुशी खरीद लाती,
मां का आंचल भरा रहे
स्वर्गलोक की दे खुशियां
मां हमेशा यह कहती है
जग में नहीं रहे दुखिया,
मां तेरी कृपा से आज ये
अपनी कविताई करता हूं
कहीं गलती ना हो जाए
तेरी एक डांट से डरता हूं।
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जरा सुनो
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मां का दर्जा पूरी सृष्टि में अव्वल होता है। भगवान सब कुछ छीन ले किंतु मां बच्चे का प्यार कभी न छीने।
**होशियार सिंह यादव, कनीना, हरि  09416348400

 कविता
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दिल की गहराई उतर, मन में पनपे भाव।
भावों का ताना बना, कविता को दो ताव।।
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*होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


 मुकदमा
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बुरा बताया मुकदमा, बुरी बताई हार।
निंदा कभी न कीजिये,निंदा पाप हजार  ।।
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*होशियार सिंह यादव

 मुकदमा
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बुरा बताया मुकदमा, बुरी बताई हार।
निंदा कभी ना करिये,निंदा पाप हजार  ।।
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*होशियार सिंह यादव


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