बादल
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झूम रहा सावन माह,बारिश करे विभोर।
बादल गरजे गगन में, वन में नाचे मोर।।
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*होशियार सिंह यादव
सुनो
झूठ के सहारे बेड़ा पार नहीं होता
झूठ का सहारा अपनों से खो देता।
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-होशियार सिंह यादव, लेखक,कनीना,हरियाणा
विषय-बादल
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सावन माह जब आये, बारिश करे विभोर।
बिजली चमके गगन में, वन में नाचे मोर।।
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*होशियार सिंह यादव
आहत
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चाहत जब कभी उभरे, मिले नहीं आराम।
आहत दिल को दर्द दे, लगे नहीं मन काम।।
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क्षणिकाएं
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एक
कोरोना की पड़ी मार
बंद हो गए द्वार,
बीमारी की मार झेल कर
खूब हुए बीमार।
दो
भाई, कोरोना का डर
अच्छा हो रहो घर
रास्ता बंद हो चुका है
कठिन है अब डगर।
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*होशियार सिंह यादव
अभिलाषा
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हर इंसान की होती है
एक नई अभिलाषा
इसी सहारे चले जिंदगी
कहलाती है आशा।
अभिलाषा जब पूरी हो
मन होता प्रसन्न
जब अभिलाष अधूरी
दुखी हो तन मन।
हर इंसान की इच्छा होती
सारे बन जाए काम
जहां भी जाऊं दिल प्रसन्न
जग में हो जा नाम।
जीते जी पूरी हो जाती
कुछ रहे अधूरी
अभिलाषाएं कुछ ऐसी हो
सपने हो ज्यों नूरी।
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*होशियार सिंह यादव
नवल काव्य
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मैंने पूछा
चांद तुम गोल हो
वर्षों से देख रहे
तुम अनमोल हो।
तेरी शीतलता
और सुंदरता
मन को लुभाती
धड़कन बढ़ाती।
एक दिन
तुम तक आऊंगा
तेरे कंधों पर बैठ
गीत गाऊंगा।
लगता है
एक दिन बोलेगा
सारे सुराग खोलेगा।
तेरे पर
बनाके बस्तियां
दुनिया रहेगी
सुंदर है यह कहेगी।
13 मई 2020
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विषय-स्वतंत्र
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जीवन सफल मानव का, जग में आये काम ।
लख बुराई सिर लेता, होगी एक दिन शाम।।
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कोरोना के युद्ध में, भारत की है जीत।
फर्ज और ईमान ही,बनते इसके मीत।।
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