अर्थव्यवस्था हालात खस्ता
****************************
***********************************
**********************
कोविड की पड़ी ऐसी मार
श्रमिक हो गए सब बेकार,
नहीं मिले अब ऋण उधार
दुख में है बच्चे और नार।
*
सेंसेक्स गिरता ही जा रहा
कोरोना में करते हाय हाय,
उद्योग धंधे हो चुके हैं बंद
श्रमिक लौटकर घर आए।
**
जनता की है हालत खस्ता
घर चले विद्यार्थी ले बस्ता,
उद्योगों ने दिखा दिया रस्ता
किसानों की हालत खस्ता।
***
दुकानों पर लग चुके ताले
फैक्ट्रियों को कौन संभाले
रोटी रोजी के पड़े हैं लाले
कोरोना महामारी प्रभु टाले।
****
अर्थव्यवस्था हो चुकी नंगी
सरकार समक्ष धन की तंगी,
नौकरियां भी नहीं भली चंगी
मजदूर बन गए अब मलंगी।
*****
लॉक डाउन का यह भूचाल
अर्थव्यवस्था हो गई बदहाल
विपत्ति में कोई चलता चाल
हाल हो गया ज्यों महाकाल।
******
सूझता नहीं अब कोई रस्ता
अर्थव्यवस्था हालत खस्ता
कोरोना रोग सांप सा डसता
बालक बूढ़ा कोई ना हंसता।
*******
अर्थव्यवस्था यूं गिर जाएगी
जन को तब बहुत रुलाएगी
बहुत बुरी बनी है महामारी
पूरी सृष्टि इस समक्ष हारी।
*******************
*होशियार सिंह यादव
खामोशी
*******
कभी-कभी खामोशी
बतलाई जाती है ठीक,
मौन रहकर मानव को
दे जाती है एक सीख।
खामोश रहकर कभी
जन कर जाता है वार,
सम्मुख देखते रह जाते
निश्चित होती एक हार।
खामोश निगाहें तीर सी
कर देती दिल पर वार,
इंसान समझ नहीं पाता
समझता एकतरफा प्यार।
बुरा बोलने से अच्छा है
खामोश रहकर दे मौका
उचित समय गलत कहेे
वो लगता जैसे है धोखा।
*******************
*होशियार सिंह यादव
आज के राजनेता
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सफेद कुर्ता, सफेद पजामा
लगते जैसे पहलवान गामा,
किसी को ताऊ कह पुकारे
किसी को बस कहते मामा।
हाथ जोड़,रखे मन में खोट
मांगते फिरे गांव-गांव वोट,
देख कर कुछ के कारनामे
मन करता इन्हें मारो सौंट।
काम पड़े तो काम ना आए
बताते फिरते वोटर में खोट,
वोट की जरूरत जब पड़ती
बस पैरों में जाएंगे ये लोट।
माला पहनी, हार पहना दो
पर हार इनको नहीं चाहिए,
जख्मों पर नमक लगवाना
तो पास नेताओं के जाइये।
नहीं किसी के हो सकते हैं
देखी हमने नेताओं की यारी,
ईमानदारी का ढोंग रचाते है
गड्डी नोटों की लगती प्यारी।
ऐसे भी नेता जो बदबू देता
कह गए कितने सच्चे कवि
आइने में अगर खुद झांकेंगे
पता लग जाएगा कैसी छवि।
*******************
स्वरचित मौलिक रचना।
********************
*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
*****
आज के तकनीकी युग में इंसान चांद पर जा चुका है किंतु इंसानियत धरती पर रेंग रही है। किंतु होना चाहिये इससे उल्टा। इसी का गम है।
**
**होशियार सिंह यादव,कनीना
राहत
***
चीन देश, घटिया सोच, कोरोना शरारत।
बनके अवतार उभरा, राहत मिली भारत।।
******
*होशियार सिंह यादव
यश
***
यश अपयश दोनों मिले, जीवन की यह रीत।
अपयश कभी न चाहिये, यश से करते प्रीत।
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कोविड की पड़ी ऐसी मार
श्रमिक हो गए सब बेकार,
नहीं मिले अब ऋण उधार
दुख में है बच्चे और नार।
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सेंसेक्स गिरता ही जा रहा
कोरोना में करते हाय हाय,
उद्योग धंधे हो चुके हैं बंद
श्रमिक लौटकर घर आए।
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जनता की है हालत खस्ता
घर चले विद्यार्थी ले बस्ता,
उद्योगों ने दिखा दिया रस्ता
किसानों की हालत खस्ता।
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दुकानों पर लग चुके ताले
फैक्ट्रियों को कौन संभाले
रोटी रोजी के पड़े हैं लाले
कोरोना महामारी प्रभु टाले।
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अर्थव्यवस्था हो चुकी नंगी
सरकार समक्ष धन की तंगी,
नौकरियां भी नहीं भली चंगी
मजदूर बन गए अब मलंगी।
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लॉक डाउन का यह भूचाल
अर्थव्यवस्था हो गई बदहाल
विपत्ति में कोई चलता चाल
हाल हो गया ज्यों महाकाल।
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सूझता नहीं अब कोई रस्ता
अर्थव्यवस्था हालत खस्ता
कोरोना रोग सांप सा डसता
बालक बूढ़ा कोई ना हंसता।
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अर्थव्यवस्था यूं गिर जाएगी
जन को तब बहुत रुलाएगी
बहुत बुरी बनी है महामारी
पूरी सृष्टि इस समक्ष हारी।
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*होशियार सिंह यादव
खामोशी
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कभी-कभी खामोशी
बतलाई जाती है ठीक,
मौन रहकर मानव को
दे जाती है एक सीख।
खामोश रहकर कभी
जन कर जाता है वार,
सम्मुख देखते रह जाते
निश्चित होती एक हार।
खामोश निगाहें तीर सी
कर देती दिल पर वार,
इंसान समझ नहीं पाता
समझता एकतरफा प्यार।
बुरा बोलने से अच्छा है
खामोश रहकर दे मौका
उचित समय गलत कहेे
वो लगता जैसे है धोखा।
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*होशियार सिंह यादव
आज के राजनेता
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सफेद कुर्ता, सफेद पजामा
लगते जैसे पहलवान गामा,
किसी को ताऊ कह पुकारे
किसी को बस कहते मामा।
हाथ जोड़,रखे मन में खोट
मांगते फिरे गांव-गांव वोट,
देख कर कुछ के कारनामे
मन करता इन्हें मारो सौंट।
काम पड़े तो काम ना आए
बताते फिरते वोटर में खोट,
वोट की जरूरत जब पड़ती
बस पैरों में जाएंगे ये लोट।
माला पहनी, हार पहना दो
पर हार इनको नहीं चाहिए,
जख्मों पर नमक लगवाना
तो पास नेताओं के जाइये।
नहीं किसी के हो सकते हैं
देखी हमने नेताओं की यारी,
ईमानदारी का ढोंग रचाते है
गड्डी नोटों की लगती प्यारी।
ऐसे भी नेता जो बदबू देता
कह गए कितने सच्चे कवि
आइने में अगर खुद झांकेंगे
पता लग जाएगा कैसी छवि।
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स्वरचित मौलिक रचना।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
*****
आज के तकनीकी युग में इंसान चांद पर जा चुका है किंतु इंसानियत धरती पर रेंग रही है। किंतु होना चाहिये इससे उल्टा। इसी का गम है।
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**होशियार सिंह यादव,कनीना
राहत
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चीन देश, घटिया सोच, कोरोना शरारत।
बनके अवतार उभरा, राहत मिली भारत।।
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*होशियार सिंह यादव
यश
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यश अपयश दोनों मिले, जीवन की यह रीत।
अपयश कभी न चाहिये, यश से करते प्रीत।

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