स्वातंत्र्य वीर सावरकर
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विधा-कविता
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राष्ट्रवादी विचारधारा
लेखक, कवि में उनका नाम,
मुंबई में पैदा हुये थे
वीर सावरकर शत शत प्रणाम।
दामोदर पंत पिता थे
राधाबाई उनकी मां का नाम,
युवा हुए मां बाप गये
पढऩे से बस उनको काम।
लंदन से ला करने पर
अभिनव भारत संगठन बनाया,
दो बार करावास हुआ
उनका बस तन-मन हर्षाया।
बम बनाना सिखलाया
उनकी क्रांतिकारी विचारधारा
झुका नहीं नहीं झुकेगा
ऐसा था वह भारत का प्यारा।
सेल्यूलर जेल भेजा था
कोल्हू के बैल सा किया काम,
भरपेट खाना नहीं
ऐसे वीर को शत-शत सलाम।
जेल से छुड़वाया उन्हें
करते रहे बस देशहित का काम,
नहीं भुला सकते कार्य
वो कहलाते है भारत की शान।
गांधी की हत्या के
लगाये गए उन पर भी आरोप,
वो सिद्ध ना हो पाए
इसलिए हो कहलाए थे निर्दोष।
अनेकों कृतियां रची
उनके नाम डाक टिकट जारी,
ऐसे थी वीर सावरकर
नहीं जग में, रोती दुनिया सारी।
धरा पर जीवन रहेगा
तब तक रहेगा उनका बस नाम,
देशभक्ति और यादें ही
बतलाती रहेंगी उनका ही काम।
मिली काला पानी सजा
जिस पर भी एक फिल्म बनाई
मनाते आज जन्मदिन
जन्म दिन की जग में खुशी छाई।
वीरों की इस श्रेणी में
उनका नाम रहे बड़ा ही प्यारा,
सदा सदा पूजनीय
वीर सावरकर देशभक्त हमारा।
कट्टर हिंदू कहलाते,
देशहित सदा दिल से चाहते थे,
देशभक्ति की बात चले
स्वातंत्र्य वीर सावरकर कहलाते ।।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनों
********
प्रभु ने इंसान बनाया है किंतु इस जहां में इंसान अपने को प्रभु समझ बैठने की भूल कर बैठता है। यही भूल तो पाप है।
*****
--होशियार सिंह यादव, कनीना,हरियाणा--
बादल/मेघ
विधा -कविता
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लो आये आकाश में
काले पीले बादल,
घुप अंधेरा छा गया
बरस रहा है जल।
जब उमड़ेंगे नभ पर
होगी तब बरसात,
किसान चले ले हल
बने बीजाई बात।
बादल राग सुनाते हैं
कवि हो प्रसन्न,
जब होगी बरसात तो
भीगेगा तन मन।
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*होशियार सिंह यादव
दोहें
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1.
सूर्य, धरती बंधकर, नियम से करे काम।
दिन की होती जब सुबह, चलकर आती रात।।
2.
नियम सभी के ही बने, विघ्र बुरी है बात।
धरा अगर तोड़े नियम, कैसे होगी रात।।
3.
नियम सभी अपनाइये, जग के हैं आधार।
जगत नियम को तोड़कर, जन बनता बेकार।।
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*होशियार सिंह यादव
इतिहास
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जब जब आते युगपुरुष, खूब रचे इतिहास।
दुष्ट कभी देते दखल, जग ना आया रास।।
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*होशियार सिंह यादव
शब्द-कैरी/कैरियांं
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कैरी ला बाजार से, डालो मधुर अचार।
खाते हैं जब साथ में, बढ़ जायेगा प्यार।।
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*होशियार सिंह यादव
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विधा-कविता
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राष्ट्रवादी विचारधारा
लेखक, कवि में उनका नाम,
मुंबई में पैदा हुये थे
वीर सावरकर शत शत प्रणाम।
दामोदर पंत पिता थे
राधाबाई उनकी मां का नाम,
युवा हुए मां बाप गये
पढऩे से बस उनको काम।
लंदन से ला करने पर
अभिनव भारत संगठन बनाया,
दो बार करावास हुआ
उनका बस तन-मन हर्षाया।
बम बनाना सिखलाया
उनकी क्रांतिकारी विचारधारा
झुका नहीं नहीं झुकेगा
ऐसा था वह भारत का प्यारा।
सेल्यूलर जेल भेजा था
कोल्हू के बैल सा किया काम,
भरपेट खाना नहीं
ऐसे वीर को शत-शत सलाम।
जेल से छुड़वाया उन्हें
करते रहे बस देशहित का काम,
नहीं भुला सकते कार्य
वो कहलाते है भारत की शान।
गांधी की हत्या के
लगाये गए उन पर भी आरोप,
वो सिद्ध ना हो पाए
इसलिए हो कहलाए थे निर्दोष।
अनेकों कृतियां रची
उनके नाम डाक टिकट जारी,
ऐसे थी वीर सावरकर
नहीं जग में, रोती दुनिया सारी।
धरा पर जीवन रहेगा
तब तक रहेगा उनका बस नाम,
देशभक्ति और यादें ही
बतलाती रहेंगी उनका ही काम।
मिली काला पानी सजा
जिस पर भी एक फिल्म बनाई
मनाते आज जन्मदिन
जन्म दिन की जग में खुशी छाई।
वीरों की इस श्रेणी में
उनका नाम रहे बड़ा ही प्यारा,
सदा सदा पूजनीय
वीर सावरकर देशभक्त हमारा।
कट्टर हिंदू कहलाते,
देशहित सदा दिल से चाहते थे,
देशभक्ति की बात चले
स्वातंत्र्य वीर सावरकर कहलाते ।।
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*होशियार सिंह यादव
जरा सुनों
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प्रभु ने इंसान बनाया है किंतु इस जहां में इंसान अपने को प्रभु समझ बैठने की भूल कर बैठता है। यही भूल तो पाप है।
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--होशियार सिंह यादव, कनीना,हरियाणा--
बादल/मेघ
विधा -कविता
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लो आये आकाश में
काले पीले बादल,
घुप अंधेरा छा गया
बरस रहा है जल।
जब उमड़ेंगे नभ पर
होगी तब बरसात,
किसान चले ले हल
बने बीजाई बात।
बादल राग सुनाते हैं
कवि हो प्रसन्न,
जब होगी बरसात तो
भीगेगा तन मन।
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*होशियार सिंह यादव
दोहें
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1.
सूर्य, धरती बंधकर, नियम से करे काम।
दिन की होती जब सुबह, चलकर आती रात।।
2.
नियम सभी के ही बने, विघ्र बुरी है बात।
धरा अगर तोड़े नियम, कैसे होगी रात।।
3.
नियम सभी अपनाइये, जग के हैं आधार।
जगत नियम को तोड़कर, जन बनता बेकार।।
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*होशियार सिंह यादव
इतिहास
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जब जब आते युगपुरुष, खूब रचे इतिहास।
दुष्ट कभी देते दखल, जग ना आया रास।।
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*होशियार सिंह यादव
शब्द-कैरी/कैरियांं
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कैरी ला बाजार से, डालो मधुर अचार।
खाते हैं जब साथ में, बढ़ जायेगा प्यार।।
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*होशियार सिंह यादव



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